नई दिल्ली। कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय की सेंट्रल टेक्निकल एडवाइजरी कमेटी (CTAC) ने रबी 2023-24 सीजन के फसल उपज अनुमान (CCE) विवाद पर बड़ा फैसला सुनाया है। कमेटी ने राज्य स्तरीय टेक्निकल एडवाइजरी कमेटी (STAC) के फैसले को बरकरार रखते हुए इंश्योरेंस कंपनी की अपील खारिज कर दी। इस निर्णय से किसानों के लिए करीब 85.5 करोड़ रुपये के मुआवजे का रास्ता साफ हो गया है।
पूर्व कृषि मंत्री जे.पी. दलाल ने कहा कि अब इंश्योरेंस कंपनी को एक हफ्ते के भीतर भुगतान करना होगा। विवाद उस समय शुरू हुआ था जब कंपनी ने भीवानी की 148, चरखी दादरी की 45 और नूंह की 38 इंश्योरेंस यूनिट में किए गए CCE पर सवाल उठाए थे। कंपनी का आरोप था कि कृषि विभाग की रिपोर्ट को बिना स्वतंत्र जांच के मान लिया गया और तकनीकी नियमों की अनदेखी की गई।
लेकिन सरकार ने तर्क दिया कि फसल कटाई के दौरान अधिकतर स्थानों पर कंपनी के प्रतिनिधि सह-साक्षी के रूप में मौजूद थे और उस समय किसी तरह की आपत्ति नहीं जताई गई। उपज डेटा घोषित होने के बाद ही कंपनी ने आपत्ति उठाई। इसके अलावा अपील तय समयसीमा के बाद दायर की गई थी, जिससे प्रक्रिया की वैधता पर भी सवाल खड़े हुए।
दस्तावेज़ों की समीक्षा के बाद CTAC ने पाया कि कंपनी के पास ठोस सबूत नहीं हैं और उनकी तकनीकी रिपोर्ट अधूरी है। कमेटी ने यह भी साफ किया कि सैटेलाइट मॉडल फील्ड-लेवल फसल उपज प्रयोगों (CCE) की जगह नहीं ले सकते।
आखिरकार, CTAC ने STAC के निर्णय को सही ठहराते हुए कंपनी को आदेश दिया कि वह वास्तविक उपज डेटा के आधार पर प्रभावित किसानों को मुआवजा चुकाए।







