चंडीगढ़ | हरियाणा सरकार की महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और सुरक्षित परिवहन सुविधा उपलब्ध कराने की पहल को फिलहाल अपेक्षित प्रतिक्रिया नहीं मिल पाई है। महिला रैपिडो पायलट प्रोजेक्ट के लिए सात जिलों में आवेदन आमंत्रित किए गए थे, लेकिन निर्धारित समय सीमा तक 50 से भी कम आवेदन प्राप्त हुए हैं।
सरकार ने महिलाओं को दोपहिया वाहन के माध्यम से अन्य महिलाओं को सुरक्षित यात्रा सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से इस योजना की शुरुआत करने की तैयारी की थी। इसके तहत 13 मार्च तक जिला कल्याण अधिकारियों के माध्यम से आवेदन मांगे गए थे। योजना का शुभारंभ 19 मार्च को प्रस्तावित है, लेकिन कम आवेदन आने के कारण अब विभाग आगे की रणनीति पर विचार कर रहा है।
सूत्रों के अनुसार अगले दो से तीन दिनों में विभाग यह निर्णय ले सकता है कि आवेदन की अंतिम तिथि बढ़ाई जाए या योजना में अन्य बदलाव किए जाएं। अधिकारियों का मानना है कि योजना को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए पर्याप्त संख्या में महिला राइडरों का होना जरूरी है।
पायलट प्रोजेक्ट के तहत सिरसा, पंचकूला, फरीदाबाद, सोनीपत, करनाल और अंबाला सहित सात जिलों को शामिल किया गया है। इन क्षेत्रों का चयन इसलिए किया गया था क्योंकि यहां निजी मोबिलिटी सेवा कंपनी रैपिडो पहले से काम कर रही है और परिवहन सेवाओं की मांग भी अधिक है।
योजना के तहत दोपहिया वाहन चलाने में सक्षम 18 से 50 वर्ष आयु वर्ग की महिलाओं से आवेदन मांगे गए थे। सामाजिक न्याय, अधिकारिता एवं अनुसूचित जाति-पिछड़ा वर्ग कल्याण (अंत्योदय) विभाग के अनुसार अनुसूचित जाति और पिछड़े वर्ग की महिलाओं को इस योजना में प्राथमिकता देने का प्रावधान रखा गया है।
इस पहल के माध्यम से महिलाओं को रोजगार का अवसर देने के साथ-साथ महिला यात्रियों के लिए सुरक्षित और सुविधाजनक परिवहन व्यवस्था उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया था। योजना के तहत चयनित महिला राइडरों को संबंधित कंपनी की ओर से वित्तीय सहायता, भत्ते और अन्य सुविधाएं भी प्रदान की जानी थीं।
विभाग के निदेशक प्रशांत पंवार ने बताया कि योजना को लेकर जल्द ही विस्तृत जानकारी साझा की जाएगी। साथ ही यह भी स्पष्ट किया जाएगा कि कम आवेदन आने की स्थिति में आगे क्या कदम उठाए जाएंगे।







