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पश्चिमी विक्षोभ से हरियाणा में बदला मौसम, बारिश और ओलावृष्टि से किसान चिंतित

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हिसार | हरियाणा में सक्रिय हुए पश्चिमी विक्षोभ का असर लगभग पूरे प्रदेश में देखने को मिला है। शनिवार रात से कई जिलों में तेज हवाओं के साथ बारिश और ओलावृष्टि दर्ज की गई, जिससे मौसम का मिजाज बदल गया है। हालांकि तापमान में गिरावट से लोगों को गर्मी से राहत मिली है, लेकिन गेहूं की फसल को संभावित नुकसान को लेकर किसानों की चिंता बढ़ गई है।

मौसम विभाग के अनुसार पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से प्रदेश के कई हिस्सों में धूल भरी आंधी, गरज-चमक के साथ बारिश और ओलावृष्टि हुई। इस दौरान 30 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं भी चलीं। रोहतक, चरखी दादरी, भिवानी, अंबाला, कुरुक्षेत्र, पंचकूला, झज्जर, करनाल और सोनीपत सहित कई जिलों में इसका असर स्पष्ट रूप से देखा गया।

बारिश और तेज हवाओं के कारण रात के तापमान में भी गिरावट दर्ज की गई है। प्रदेश के अधिकांश जिलों में न्यूनतम तापमान 18 डिग्री सेल्सियस से नीचे रहा। महेंद्रगढ़ में सबसे कम न्यूनतम तापमान 12.5 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया, जबकि हिसार, अंबाला, रोहतक और चरखी दादरी में यह करीब 17 डिग्री सेल्सियस के आसपास दर्ज किया गया। सुबह के समय ठंडी हवाओं के कारण लोगों को हल्की ठंडक का एहसास हुआ, हालांकि दिन का अधिकतम तापमान अभी भी 30 से 32 डिग्री सेल्सियस के बीच बना हुआ है।

भारतीय मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में सबसे अधिक वर्षा रोहतक में 7.2 मिलीमीटर दर्ज की गई। इसके अलावा चरखी दादरी में 7 मिलीमीटर, सिरसा में 5.5 मिलीमीटर, पानीपत में 4 मिलीमीटर, सोनीपत में 3.5 मिलीमीटर और करनाल में 1.5 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड की गई।

मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि 16 मार्च को भी कुछ क्षेत्रों में हल्की बूंदाबांदी हो सकती है। वहीं पहाड़ी राज्यों हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और उत्तराखंड में बर्फबारी की संभावना जताई गई है।

मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार 18 मार्च की रात एक और पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने की संभावना है, जिससे प्रदेश में फिर से हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। मौसम विभाग का अनुमान है कि 20 मार्च तक प्रदेश में मौसम परिवर्तनशील बना रहेगा। इसके बाद 24 और 28 मार्च के आसपास भी नए पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हो सकते हैं, जिससे बारिश की गतिविधियां फिर बढ़ सकती हैं।

मौसम विभाग ने किसानों को सतर्क रहने की सलाह दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि गेहूं की फसल को ओलावृष्टि और तेज हवाओं से नुकसान पहुंच सकता है, इसलिए खेतों में रखी कटी फसलों को सुरक्षित स्थान पर रखने और फसल की निगरानी करने की आवश्यकता है।

 

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