गुड़गांव | सेक्टर-67 स्थित अंसल एसेंसिया सोसाइटी एक बार फिर विवादों में आ गई है। यहां के निवासियों ने मौजूदा RWA (रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन) पर फर्जी तरीके से Ireo बिल्डर प्रोजेक्ट के साथ समझौता करने का आरोप लगाया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस कथित अनुबंध के तहत बिना अनुमति के सोसाइटी की जमीन पर बिजली लाइन डालने के लिए रातोंरात खुदाई कर दी गई, जिससे सोसाइटी की स्थिति बिगड़ गई।
प्रशासनिक मिलीभगत के भी आरोप
निवासियों ने यह भी दावा किया है कि इस पूरे प्रकरण में प्रशासनिक अधिकारियों की मिलीभगत भी है। उनका कहना है कि इस मामले में उन्होंने पहले भी DTP विभाग को शिकायत दी थी, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। आरोपों के मुताबिक, बिल्डर ने अब तक अधूरे पड़े विकास कार्यों को नजरअंदाज करते हुए खुद को NCLT के जरिए कानूनी सुरक्षा देने की कोशिश की है।
‘बिक नहीं सकती थी ज़मीन, फिर भी बेची गई’
स्थानीय निवासी तेजपाल ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि बिल्डर ने सोसाइटी की उन जमीनों को भी बेच दिया जो कानूनी तौर पर बेची नहीं जा सकती थीं, जिसमें मंदिर और स्कूल के लिए आरक्षित भूखंड भी शामिल हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान RWA अब बिल्डर के हितों को बढ़ावा दे रही है और नियमों को ताक पर रखकर कार्य कर रही है।
“लाखों के लालच में हुआ फर्जी एग्रीमेंट”
निवासियों का आरोप है कि RWA ने मोटे आर्थिक लाभ के लिए यह एग्रीमेंट फर्जी तरीके से साइन किया है, जबकि आरडब्ल्यूए को केवल वेंडर नियुक्त करने का अधिकार है, इस तरह का समझौता करना उसके अधिकार क्षेत्र से बाहर है। इस निर्णय के बाद खुदाई और पाइपों के ढेर के कारण स्थानीय निवासी मंदिर तक नहीं जा पा रहे हैं, जिससे धार्मिक भावनाएं भी आहत हो रही हैं।
पहले भी विवादों में रही है अंसल सोसाइटी
अंसल एसेंसिया सोसाइटी पहले भी कई बार विवादों में रह चुकी है—चाहे बात बिजली सबस्टेशन के निर्माण की हो या सड़कों की मरम्मत की। करीब दो साल पहले सोसाइटी के बीच से सिंचाई विभाग द्वारा बरसाती नाले के लिए खुदाई भी शुरू कर दी गई थी। इस पर उस समय के RWA प्रधान धर्मेंद्र तंवर ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर कार्य रुकवाया था।
तंवर ने ही बिजली सबस्टेशन निर्माण और सड़क सुधार जैसे मुद्दों पर बिल्डर के खिलाफ मोर्चा खोला था। वहीं अब मौजूदा RWA को लेकर निवासियों में नाराजगी है।
RWA प्रधान का पक्ष नहीं मिल सका
जब वर्तमान RWA प्रधान गोविंद चौहान से संपर्क कर उनका पक्ष जानने की कोशिश की गई तो उन्होंने व्यस्तता का हवाला देते हुए बाद में जवाब देने की बात कही।







