यमुनानगर,परवेज खान-:हरियाणा और हिमाचल प्रदेश की सीमा से सटे यमुनानगर के सुनसान जंगलों में एक शख्स पिछले 12 वर्षों से मानवता की ऐसी मिसाल पेश कर रहा है,जिसे देखकर हर कोई भावुक हो जाता है।भीषण गर्मी में जहां लोग घरों से बाहर निकलने से बचते हैं,वहीं पालाराम नामक व्यक्ति रोजाना नंगे पांव जंगल के रास्ते पर खड़े होकर राहगीरों की प्यास बुझाने का काम कर रहे हैं।उनकी यह सेवा इलाके में चर्चा का विषय बनी हुई है और लोग उन्हें फरिश्ते की तरह मानने लगे हैं।
नगली गांव से रणजीतपुर की ओर जाने वाले जंगल के रास्ते पर पालाराम ने एक छोटी सी झोपड़ी बनाई हुई है।इस झोपड़ी के अंदर पांच बड़े मटके रखे गए हैं,जिनमें हमेशा ठंडा पानी भरा रहता है।खास बात यह है कि इस सुनसान इलाके में पानी की कोई सरकारी व्यवस्था नहीं है।इसके बावजूद पालाराम रोजाना करीब पांच किलोमीटर दूर से सिर पर मटका रखकर पानी लेकर आते हैं और राहगीरों को पिलाते हैं।पालाराम बताते हैं कि उन्होंने यह सेवा सिरसा वाले बाबा की प्रेरणा से शुरू की थी। शुरुआत में उन्होंने इसे कुछ दिनों की सेवा समझकर शुरू किया था,लेकिन धीरे-धीरे लोगों की दुआएं और आशीर्वाद उन्हें इस काम के लिए प्रेरित करते रहे। आज 12 साल बाद भी उनका यह सिलसिला लगातार जारी है।गर्मी के मौसम में जंगल के इस रास्ते से गुजरने वाले लोगों के लिए पालाराम की झोपड़ी किसी राहत केंद्र से कम नहीं है।राहगीरों का कहना है कि दूर-दूर तक पानी की कोई सुविधा नहीं मिलती और ऐसे में पालाराम का ठंडा पानी उन्हें नई ऊर्जा देता है। कई लोग यहां रुककर पानी पीते हैं और पालाराम के इस सेवा भाव की सराहना करते हैं।
पालाराम का कहना है कि जब कोई प्यासा व्यक्ति पानी पीकर संतुष्टि के साथ आगे बढ़ता है तो उन्हें आत्मिक शांति मिलती है। यही सुकून उन्हें हर दिन इस सेवा के लिए प्रेरित करता है।उनका मानना है कि इंसानियत से बड़ा कोई धर्म नहीं होता और जरूरतमंद की मदद करना सबसे बड़ा पुण्य है।हालांकि पालाराम इस सेवा के बदले किसी से कुछ नहीं मांगते,लेकिन राह चलते कई लोग खुशी से उन्हें 10 या 20 रुपये दे जाते हैं ताकि उनका यह नेक काम चलता रहे। इन छोटी-छोटी मददों से ही वह मटकों की व्यवस्था और पानी लाने का काम जारी रखते हैं।स्थानीय लोगों का कहना है कि आज के दौर में जहां अधिकतर लोग अपने स्वार्थ में व्यस्त हैं,वहीं पालाराम जैसे लोग समाज के लिए प्रेरणा हैं। बिना किसी लालच और पहचान की इच्छा के वह वर्षों से राहगीरों की सेवा कर रहे हैं। उनकी यह पहल यह संदेश देती है कि अगर मन में सेवा का भाव हो तो छोटी सी कोशिश भी हजारों लोगों के लिए राहत बन सकती है।भीषण गर्मी में जंगल के बीच खड़े होकर राहगीरों को पानी पिलाने वाले पालाराम आज इंसानियत और सेवा भावना की जीती-जागती मिसाल बन चुके हैं।







