कुरुक्षेत्र : चन्द्रिका ( TSN)- भीषण गर्मी व बढ़ती बिजली खपत के चलते फीडरों में लगे ट्रांसफार्मर भी हांफने लगे हैं। ऐसे में इनका तापमान सामान्य बनाए रखने के लिए पंखे व कूलरों का सहारा लिया जा रहा है। यहां तक कि हर आधे घंटे बाद इनका तापमान जांचा जा रहा है। पिपली के 33 केवी सब स्टेशन में निगम द्वारा यह अहम कदम उठाए गए है, जहां कूलिंग पंखे लगाकर ट्रांसफार्मरों के तापमान को बढ़ने से रोका जा रहा था! लेकिन तापमान ट्रांसफार्मर का सामान्य ना होने के कारण अब उन पर उपकरणों के द्वारा पानी की बौछारे भी करी जा रही है! ताकि ट्रांसफार्मर का तापमान सामान्य रहे और उपभोक्ता को बिना किसी परेशानी के बिजली मिलती रहे.
नौतपा के चलते पिछले साल के मुकाबले इस बार बिजली की खपत बढ़ी
नौतपा के चलते पिछले साल के मुकाबले इस बार सात लाख 16 हजार यूनिट बिजली की खपत बढ़ी है. जबकि साल 2023 में मई महीने में 13 लाख 13 हजार थी और अब साल 2024 में पिछले महीने मई में बढ़कर 20 लाख 30 हजार के करीब पहुंच गई है। जिले में तीन लाख 25 हजार 850 के करीब बिजली के कनेक्शन है, जिनमें से दो लाख 37 हजार कनेक्शन घरों, और कमर्शियल, खेती, स्ट्रीट लाइट, रेलवे विभाग के शामिल हैं, जबकि सरकारी कार्यालयों की बात की जाए तो 88 हजार के करीब बिजली के कनेक्शन है।
12 फीडरों के ट्रांसफार्मरों पर लगाए गए कूलर व पंखे
33 केवी पिपली पावर हाउस के JE विकास पाल का कहना है कि ट्रांसफार्मर के गर्म होने पर आग लगने का खतरा रहता है, इसलिए ट्रांसफार्मर के तापमान को काबू में रखने के लिए कूलर और पंखों का प्रयोग किया जा रहा है। इसके लिए 12 फीडरों पर कूलर और पंखे लगाए गए थे गर्मी ज्यादा होने के कारण ट्रांसफार्मर तापमान दिन-राधे बढ़ रहा था इसी चीज को ध्यान में रखते हुए उच्च अधिकारी को निर्देश के हिसाब से ट्रांसफार्मर के ऊपर उपकरणों के द्वारा पानी की विचारों का भी प्रबंध किया गया है ताकि उपभोक्ताओं को किसी तरह की परेशानी ना हो। आधे घंटे के बाद उसका तापमान भी चेक किया जा रहा है। ट्रांसफार्मर का सामान्य तापमान 60 से 80 तक होता है, जबकि 80 से 120 होने पर खतरे की संभावना बढ़ जाती है।
उपकरणों के द्वारा पानी की बौछारो का किया प्रबंध
भीषण गर्मी के चलते बिजली की खपत ज्यादा होने पर ट्रांसफार्मरों पर लोड ज्यादा रहता है, जिसके कारण ट्रांसफार्मरों के गर्म होने से जलने की संभावना रहती है, जिससे बिजली आपूर्ति प्रभावित होने की संभावना भी रहती है। ट्रांसफार्मरों को झुलसने से बचाने के लिए अब 12 फीडरों पर कूलर और कूलिंग पंखे के साथ अब उपकरणों की सहायता से पानी की बौछार का भी प्रबंध किया गया है.







