भिवानी | हरियाणा के भिवानी जिले के बडेसरा गांव के किसान पुत्र सचिन पंवार ने कड़ी मेहनत और आत्मविश्वास के दम पर UPSC परीक्षा में 612वीं रैंक हासिल कर एक मिसाल कायम की है। कभी एक स्कूल से “अयोग्य” बताकर निकाले गए सचिन की यह सफलता आज हर UPSC अभ्यर्थी के लिए प्रेरणा बन गई है।
सचिन के पिता खेती से जुड़े हैं और कठिन हालात में भी उन्होंने बेटे को अच्छी शिक्षा देने का प्रयास किया। हालांकि, एक निजी स्कूल ने सचिन को कमजोर छात्र मानकर निकाल दिया। इसके बाद उन्होंने दूसरे स्कूल में दाखिला लिया और पढ़ाई पर गंभीरता से ध्यान देना शुरू किया।
UPSC की परीक्षा, ताकि पिता का हल छूटे
सचिन ने बचपन से देखा था कि उनके पिता किस तरह मौसम की परवाह किए बिना खेतों में मेहनत करते हैं। इसी प्रेरणा ने उन्हें UPSC की राह पर चलने के लिए मजबूती दी। उन्होंने दिन-रात मेहनत कर यह परीक्षा पास की और कहा, “मैंने UPSC इसलिए दी ताकि पापा का हल छूटे और उनका संघर्ष मेरा सपना बन सके।”
“परिणाम नहीं, प्रयास में देखो सफलता”
सचिन का मानना है कि सफलता केवल परिणाम नहीं, प्रयासों की निरंतरता में छिपी होती है। उन्होंने बताया कि UPSC की तैयारी के दौरान उन्होंने प्रीलिम्स के लिए प्रतिदिन 7-8 घंटे और मेंस के लिए 10 घंटे तक अध्ययन किया। अपनी सफलता का श्रेय उन्होंने अपने माता-पिता, शिक्षकों और मित्रों को दिया।
शिक्षक का संदेश: हर बच्चा खास होता है
सचिन के मार्गदर्शक शिक्षक समशेर सिंह ने उनकी सफलता पर कहा, “बच्चे कभी फेल नहीं होते, अगर वे असफल होते हैं तो असल में अभिभावक और शिक्षक असफल होते हैं।” उन्होंने बताया कि जब सचिन को सही दिशा मिली, तो वह दिल्ली यूनिवर्सिटी तक पहुंचा, जहां उसकी पर्सनैलिटी डेवलप हुई और उसने प्रतियोगिता में खुद को साबित किया।







