यमुनानगर | बीती रात आए तेज आंधी-तूफान और बारिश ने एक ओर जहां लोगों को गर्मी से राहत दी, वहीं दूसरी ओर यमुनानगर जिला प्रशासन के उन दावों पर सवाल खड़े कर दिए, जिनमें कहा गया था कि “गेहूं का एक दाना भी बारिश की भेंट नहीं चढ़ेगा”। तेज बारिश के कारण जगाधरी अनाज मंडी में खुले में रखी करीब 2000 गेहूं की बोरियां भीग गईं, जिससे गेहूं के खराब होने की आशंका है।
बारिश से भीगीं करीब 2000 बोरियां
जानकारी के अनुसार, जगाधरी की नई अनाज मंडी में अब गेहूं की आवक लगभग समाप्त हो चुकी है, लेकिन मंडी सचिव की लापरवाही के चलते सड़क किनारे पड़ी गेहूं की हजारों बोरियों पर न तो कोई तिरपाल था और न ही उन्हें उचित ढंग से उठाया गया था। तेज बारिश में ये बोरियां भीग गईं।
इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए एसडीएम सोनू राम ने माना कि बारिश के चलते गेहूं को नुकसान पहुंचा है। उन्होंने बताया कि “लगभग 98 फीसदी लिफ्टिंग पूरी हो चुकी है” और जो नुकसान हुआ है, उसकी रिपोर्ट तैयार की जा रही है।
प्रशासनिक दावे बनाम ज़मीनी हकीकत
हालांकि, बड़ा सवाल यही है कि अगर 98% गेहूं की लिफ्टिंग हो चुकी थी, तो मंडी में शेड के नीचे इतनी बड़ी संख्या में गेहूं की बोरियां क्यों पड़ी थीं? साथ ही, तिरपाल और स्टैंड जैसे जरूरी इंतजाम क्यों नहीं किए गए?
प्रशासन ने पूर्व में यह दावा किया था कि मंडी में सभी सुरक्षा और भंडारण के इंतजाम पूरे हैं, लेकिन मौजूदा हालात उन दावों के उलट दिखाई दे रहे हैं। अब इस नुकसान की जिम्मेदारी किसकी होगी और इसकी भरपाई कौन करेगा — यह बड़ा सवाल है।







