हिसार, 12 दिसम्बर —10 साल होने पर हिसार के केद्रीय भैंस अनुसंधान केंद्र फार्म (सीआईआरबी) में संस्थान के पहले व देश के दूसरे कलोन झोटे हिसार गौरव का नौ साल होने पर जन्म दिन मनाया गया है। इस दौरान सभी वैज्ञानिको ने केक काट कर जन्म दिन मनाया गया। फार्म के निदेशक डा. टीके दत्ता ने बताया कि दस दिसंबर को (2015 ) को हिसार गौरव का जन्म हुआ था। करीब एक हजार किलोग्राम वजनी इस झोटे से प्राप्त सीमन से पशुओं का 45 प्रतिशत से अधिक गर्भाधान हो रहा है अभी तक हिसार गौरव से 22 हजार डोज का उत्पादन कर चुका है इसका उपयोग कृत्रिम गर्भा धान के लिए बडे पैमाने पर किया गया है।
हिसार गौरव के एक सीमन की कीमत पांच सौ रुपये तक होती है.
हिसार गौरव के एक सीमन की कीमत पांच सौ रुपये तक होती है इसका खाने पीने के लेकर ध्यान रखा जाता है इसे वजन के हिसाब से दाना पानी दिया जाता है झोटे का वजन एक हजार किलो है एक बार में पांच किलो दाना और हरा चारा दिया जाता है। इसके लिए अलावा खनिज लवण की मात्रा डाइटीशियन के हिसाब से दिया जाता है कलोन झोटे को एक दिन में एक बार आरओ का पानी दिया जाता है और आरओ को पानी से नहलाया जाता है। फार्म में हिसार के गौरव के दो बेटे भी है एक बेटा 5405 नेशनल डेयरी डेवलपमेंट ौर बोर्ड इस्तेमाल करेगा इसके सीमन ने नबबे हजार जोड बना चुके है। जबकि दूसरे बेटे 5414 के सीमन की एक लाख डोज बना चुके है यह डोज 49 हजार पशुपालको को उपलबध करवाई है। सिरसा डेरे में भैसो की गुणवत्ता बढाने के लिए सीमन का इस्तेमाल किया गया है जिसके अच्छे परिणाम सामाने आए है।
CIRB का पहला व देश का दूसरा कलोन झोटे
सीआईआरबी मे मुर्राह नस्ल के झोटे का अपना पहला कलोन तैयार किया था पीटी बुल (4354) के कलोन है करीब सवा तीन साल बाद इससे उच्च गुणवत्ता का सीमन देना शुरु कर दिया था हिसार गौर से सीमन से दो झोटे अभी तक दो लाख से ज्यादा एआई की डोज उपलबध करवाई है। इसकी झोटियों ने दूध उतपादन में अच्छी खासी बढोतरी हासिल की है जो प्रति बयान्त लगभग 300 सौ से लेकर 600 सौ लीटर दूध का उत्पादन किया है। हिसार गौरव की सीमन तकनीक का उपयोग करने वाले किसानो ने दूध उत्पाद में महत्पूर्ण सुधार की सूचना दी है।
जन्मदिन मानाने के दौरान ये वैज्ञानिक मौजूद रहे
केंद्रीय भैस अनुसंधान केंद्र में हिसार गौरव का जन्म मनाया गया है इस दौरान पूर्व निदेशक डा आर के सेठी, फिजियोलाजी के पूर्व अध्यक्ष डा. एसके जिंदल, वर्तमाना निदेशक डा. टीके दत्ता, डा. यशपाल शर्मा, प्रोजेकट के पीआई डा. पीएस यादव dr rajesh मौजूद थे। संस्थान ने कलोनिगं की जागरुकता के लिए सेमीनार का आयोजन किया जिसमें सस्थान के वैज्ञानिक व कर्मचारी शमिल हुए।







