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106 वर्षीय ‘उड़नपरी’ दादी ने फिर रोशन किया हरियाणा का नाम, 18वीं एथलेटिक्स चैंपियनशिप में जीते Gold Medal

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चरखी दादरी (एकता): आपने एक कहावत तो सुनी होगी कि मंजिलें उन्हीं को ही मिलती हैं, जिनके सपनों में जान होती है, पंखों से कुछ नहीं होता, हौसलों से ही उड़ान होती है। ऐसा ही कुछ हरियाणा के चरखी दादरी में रहने वाली 106 वर्षीय ‘उड़नपरी’ दादी ने कर दिखाया। उसने हरियाणा का नाम एक बार फिर रोशन किया। मीडिया सूत्रों के अनुसार उड़नपरी दादी एक बार फिर सुर्खियों में बनी हुई है।

18वीं राष्ट्रीय एथलेटिक्स चैंपियनशिप में जीते 2 गोल्ड मेडल

बता दें कि सोमवार को देहरादून में 18वीं राष्ट्रीय एथलेटिक्स चैंपियनशिप में 106 वर्षीय उड़नपरी दादी ने 2 गोल्ड मेडल जीते। यह प्रतियोगिता 2 दिवसीय थी। जहां कई देशों से खिलाड़ी भाग लेने आए हुए थे। उनमें से एक हरियाणा की उड़नपरी दादी रमाबाई रहीं। उनके हौसले की सब लोग दात दे रहे हैं। 106 वर्षीय दादी ने 100, 200 मीटर दौड़ में भाग लेकर गोल्ड मेडल जीता। उन्होंने शॉटपुट इवेंट में भी अपने दमदार प्रदर्शन किया। खास बात यह है कि रामबाई राष्ट्रीय स्तर की एथलेटिक्स चैम्पियनशिप में अपनी 3 पीढ़ियों के साथ 4 गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास बना चुकी हैं।

2021 में भी जीते थे 4 गोल्ड मेडल जीते 

गौरतलब है कि दादी ने नवंबर 2021 में भी हुई प्रतियोगिता में 4 गोल्ड मेडल जीतकर नाम रोशन किया था। वह अपने गांव की सबसे बुजुर्ग महिला हैं। उनको सभी लोग उड़नपरी पड़दादी (परदादी) कह कर बुलाते हैं। वह पूरी तरह से सेहतमंद हैं। अपना खाने-पीने का पूरा ध्यान रखती हैं। 1 जनवरी, 1917 को जन्मी गांव कादमा निवासी राम बाई बुजुर्ग एथलेटिक्स खिलाड़ी हैं। हैरानी की बात यह है कि उन्होंने कहीं बाहर जाकर नहीं बल्कि खेतों के कच्चे रास्तों पर खेल की प्रैक्टिस की। वह सुबह जल्दी उठकर कड़ी मेहनत करती थी। लगातार दौड़ और पैदल चलने का अभ्यास करती।250 ग्राम घी हर रोज रोटी या चूरमे में लेती हैं। वह अपनी सेहत का भी खास ख्याल रखती हैं। उनके बच्चे, बहू भी चैंपियन हैं।

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