कुरुक्षेत्र (एकता): हमारे देश में कई धार्मिक स्थल देखने को मिलते हैं। इनमें से कई स्थल तो ऐसे हैं जिनसे कई इतिहास जुड़े होते हैं। लेकिन कई मंदिरों व धार्मिक स्थलों के रहस्य चौंकाने वाले होते हैं। जो अनसुलझे ही रहते हैं। आज हम आपको अपने एक ऐसे ही चमत्कारी धार्मिक स्थल से रु-ब-रु करवाएंगे जो बेहद खास है।
पवित्र मारकण्डा नदी के तट पर है मारकंडेश्वर महादेव मंदिर
प्राचीन काल और सदियों पहले भगवान व देवी-देवताओं के भी बहुत से रहस्य सुनने को मिलते हैं, लेकिन धर्मनगरी कुरुक्षेत्र के निकट कस्बा इस्माईलाबाद के पास गांव ठसका मीरां जी में पवित्र मारकण्डा नदी के तट पर मारकंडेश्वर महादेव मंदिर एक ऐसा मंदिर है, जहां आज के युग में भी चमत्कार सुनने को मिलते हैं। यहां भगवान शिव ने खुद अपना मंदिर बनवाया था। इसके आसपास दर्जनों गांव हैं। करीब दो दशक पहले यहां गुरुद्वारे के निर्माण की योजना यहां आसपास दर्जनों गांवों के लोगों ने बनाई थी।
मारकण्डा नदी के ऊपर से नहीं गुजर सकती कोई नदी
इस मंदिर के निर्माण के लिए सिख समुदाय के लोगों के साथ-साथ किन्नर वर्ग ने भी विशेष सहयोग दिया है। बताया जाता है कि इस मंदिर में जो भी सच्चे मन से ऋषि मार्कण्डेय की शरण लेता है उसका नशा अपने आप छूट जाता है। यह एक ऐसा मन्दिर है जो आपसी प्रेम और भाईचारे का प्रतीक है। इस मंदिर में शिवरात्रि मेला, श्री गणेश महोत्सव, ऋषि मार्कण्डेय जयन्ती इत्यादि कार्यक्रम तो होते ही हैं। साथ ही यहां गुरु गोबिंद सिंह के साहिबजादों के शहीदी दिवस के साथ अखण्ड पाठ और लंगरों का आयोजन भी हर साल होता है।
विशाल शिवलिंग और शिव परिवार की प्रतिमाएं विद्यामान
आज के युग में अनोखा चमत्कार है कि कोई भी नदी और नहर मारकण्डा नदी के ऊपर से नहीं गुजर सकती। मारकंडेश्वर महादेव मंदिर के साथ ही उनका अखण्ड तप है, जहां की राख मात्र को छूने से रोगों से मुक्ति मिलती है। साथ ही भगवान शिव का सुंदर व अद्भुत मंदिर है जिस में विशाल शिवलिंग और शिव परिवार की प्रतिमाएं विद्यामान हैं। ऋषि मार्कण्डेय भगवान शिव के परम भक्त थे। भगवान शिव की कृपा से ही मार्कण्डेय का जन्म हुआ था। शिव ने मार्कण्डेय को सोलह साल की उम्र प्रदान की थी।







