Home Haryana पुलिस को मिली सफलता, अस्पताल में फायरिंग मामले में पांच आरोपी गिरफ्तार

पुलिस को मिली सफलता, अस्पताल में फायरिंग मामले में पांच आरोपी गिरफ्तार

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कुरुक्षेत्र (अकुंर कपूर): हरियाणा के कुरुक्षेत्र में जान से मारने की नियत से फायरिंग करने के पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। बता दें कि इन आरोपियों ने 5 सितंबर को अस्पताल में घुसकर फायरिंग की थी। जिसके चलते आदित्य उर्फ आशु पुत्र संतोख सिंह वासी देवीदासपुरा, हर्ष गुररे पुत्र ज्ञाना राम वासी सैक्टर-5 कुरुक्षेत्र, चिराग शर्मा पुत्र शिवकुमार वासी शनि मंदिर कालोनी लाडवा रोड पीपली, अमन सैनी पुत्र सुरेश सैनी वासी रतगल थानेसर व अभिषेक उर्फ नितिन पुत्र देवेन्द्र कुमार वासी बरोट थाना ढाण्ड जिला कैथल में गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की।

जानकारी देते हुए सीआईए इंचार्ज प्रतीक कुमार ने बताया कि इस केस में मनु शर्मा पुत्र नरेश कुमार वासी मोहन नगर लायलपुर बस्ती जिला कुरुक्षेत्र ने थाना केयूके पुलिस को अपनी शिकायत दी। उसने बताया कि वह अपने दोस्त अमन पुत्र गुलशन व अभिषेक पुत्र देव नारायण वासीयान मोहन नगर थानेसर के साथ चौधरी हुक्का भंडार बाल्मिकी मंदिर ढाण्ड रोड कुरुक्षेत्र पर बैठा हुआ था। जिस समय वह तीनों वहां से चले तो एलएनजेपी अस्पताल के पास पीछे से एक स्वीफट कार ने उनकी मोटरसाइकिल को टक्कर मारी।

कार की टक्टर लगते ही वह मोटरसाइकिल सहित सड़क पर नीचे गिर गए। उसके बाद कार से चिराग वासी पीपली नीचे उतरा और उसने असला निकालकर उस पर फायरिंग की। उस पर आर्यन शर्मा व गुररे शुटर ने मोटरसाइकिल पर आए कुछ लड़कों ने भी फायरिंग की। उसके बाद वह जान बचाकर मोर्चरी हाउस की गली से होता हुआ एलएनजेपी अस्पताल के एमरजेंसी वार्ड के ग्राउंड फ्लोर पर बने बाथरुम में घुस गया और अंदर से कुंडी लगा ली। उन्होंने बाथरुम के दरवाजे पर भी फायर किए। वह फायर करके मौका से फरार हो गए। जिसकी शिकायत पर थाना केयूके में मामला दर्ज करके मामले की जांच बाद में अपराध अन्वेषण शाखा-2 को सौंपी गई।

पुलिस की जांच से पता चला कि आरोपियों ने मनु शर्मा पर लड़ाई झगड़े की रंजिश के कारण फायरिंग की थी। आरोपियों ने बताया कि वारदात वाले दिन ही सुबह के समय मनु शर्मा व उसके साथियों ने देवांश वासी पीपली के घर में घुसकर चोट मारी थी। पुलिस टीम ने आरोपियों को माननीय अदालत में पेश करके अदालत के आदेश से 05 दिन के पुलिस रिमांड पर लिया। रिमांड अवधि के दौरान आरोपियों के कब्जे से वारदात में असला प्रयोग किया गया।

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