Haryana,14 December-:आयुर्वेद के प्रचार-प्रसार और जनजागरूकता के उद्देश्य से आयोजित Ayurved Festival 2025 आज अपने अंतिम चरण में पहुंच गया। तीन दिनों तक चले इस महोत्सव में देश के विभिन्न राज्यों से आए आयुर्वेद चिकित्सकों,शिक्षाविदों,शोधकर्ताओं और डेलिगेट्स ने भाग लिया। आयोजन का मुख्य उद्देश्य आयुर्वेद की प्राचीन ज्ञान परंपरा को आधुनिक जीवनशैली से जोड़ना और इसके वैज्ञानिक महत्व को आम लोगों तक पहुंचाना रहा।
महोत्सव के दौरान आयुर्वेदाचार्यों ने अपने व्यावहारिक अनुभव साझा किए और बताया कि किस प्रकार आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में सुरक्षित,प्रभावी और दीर्घकालिक लाभ प्रदान कर सकती है।कार्यक्रम में आयोजित सेमिनारों और कार्यशालाओं में रोगों की रोकथाम,पंचकर्म चिकित्सा,आहार-विहार,योग और प्राकृतिक जीवनशैली जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई।आयोजन के विशेष सत्रों में आम नागरिकों की भी बड़ी भागीदारी देखने को मिली।विशेषज्ञों ने बताया कि आयुर्वेद केवल रोगों के उपचार तक सीमित नहीं है,बल्कि यह संपूर्ण स्वास्थ्य प्रबंधन की एक समग्र प्रणाली है,जो शरीर,मन और आत्मा के संतुलन पर आधारित है।
इस अवसर पर आयुर्वेद विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर अरुण कुमार त्रिपाठी की उपस्थिति भी रही।उन्होंने आयुर्वेद शिक्षा,अनुसंधान और युवाओं की भागीदारी पर अपने विचार रखते हुए कहा कि आयुर्वेद को आधुनिक शोध और तकनीक से जोड़ना समय की आवश्यकता है।उन्होंने युवाओं से आयुर्वेद को करियर और सेवा दोनों के रूप में अपनाने का आह्वान किया।प्रो.त्रिपाठी ने कहा कि आयुर्वेद केवल बीमारी का इलाज नहीं,बल्कि स्वस्थ,संतुलित और अनुशासित जीवन जीने की कला सिखाता है।महोत्सव का समापन आयुर्वेद के प्रति सकारात्मक संदेश और भविष्य में इसके व्यापक उपयोग के संकल्प के साथ किया गया।







