रोहतक | दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों पर हुए कथित लाठीचार्ज और NEET पेपर लीक विवाद को लेकर हरियाणा में शुक्रवार को विपक्षी दलों, किसान संगठनों, वकीलों और छात्र संगठनों ने व्यापक विरोध प्रदर्शन किया। रोहतक, झज्जर और फतेहाबाद के टोहाना सहित कई स्थानों पर प्रदर्शन हुए, जहां केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की गई और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग उठाई गई।
रोहतक में इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) के कार्यकर्ताओं ने मनजीत कन्हेली और जिला पार्षद धीरज मलिक के नेतृत्व में दिल्ली रोड पर विरोध मार्च निकाला। प्रदर्शनकारियों ने सीटीएम शुभम और डीजीपी के नाम ज्ञापन सौंपते हुए पेपर लीक प्रकरण की निष्पक्ष जांच, दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई और छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई की जांच की मांग की। इनेलो नेताओं ने कहा कि छात्रों पर बल प्रयोग लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत है और यदि मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो प्रदेशभर में आंदोलन तेज किया जाएगा।
उधर, पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के आह्वान पर जिला बार एसोसिएशन रोहतक ने एक दिन के लिए न्यायिक कार्य का बहिष्कार किया। वकीलों ने नए डिफेंस काउंसिल की नियुक्ति में कथित विसंगतियों के साथ-साथ पेपर लीक से प्रभावित छात्रों के समर्थन में धरना दिया। प्रदर्शन के दौरान अधिवक्ताओं ने नाबालिग छात्रों पर पुलिस बल प्रयोग को गंभीर विषय बताते हुए इसकी निष्पक्ष जांच की मांग की।
झज्जर में इनेलो जिलाध्यक्ष सतपाल पहलवान के नेतृत्व में कार्यकर्ता लघु सचिवालय पहुंचे और जिला प्रशासन के माध्यम से राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि छात्रों की आवाज को दबाने के लिए की गई पुलिस कार्रवाई दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देने की मांग दोहराई।
फतेहाबाद के टोहाना में संयुक्त किसान मोर्चा के बैनर तले किसान, मजदूर, छात्र और विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों ने विरोध मार्च निकाला। टाउन पार्क से शुरू हुआ प्रदर्शन बाल्मीकि चौक तक पहुंचा, जहां प्रदर्शनकारियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का प्रतीकात्मक पुतला फूंका। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि युवाओं की समस्याओं का समाधान करने के बजाय उनकी आवाज दबाने का प्रयास किया जा रहा है।
प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार से पेपर लीक मामलों की पारदर्शी जांच कराने, दोषियों पर सख्त कार्रवाई करने और छात्र हितों की रक्षा के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मांगें पूरी नहीं हुईं तो राज्यभर में विरोध प्रदर्शन और तेज किए जाएंगे।







