चंडीगढ़ | हरियाणा में वीआईपी सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा कदम उठाते हुए पुलिस विभाग ने 72 वीआईपी व्यक्तियों की सुरक्षा वापस ले ली है। यह निर्णय जिला स्तर पर आयोजित सुरक्षा समीक्षा बैठकों के आधार पर लिया गया, जिसमें थ्रेट इनपुट, एक्सटॉर्शन कॉल और अन्य सुरक्षा मानकों की विस्तृत जांच की गई। इस कार्रवाई के बाद 200 से अधिक पीएसओ को वीआईपी ड्यूटी से हटाकर नियमित पुलिस कार्यों में वापस बुला लिया गया है।
डीजीपी ओ.पी. सिंह ने अपने आधिकारिक प्लेटफ़ॉर्म पर जानकारी साझा करते हुए कहा कि राज्य में अब सुरक्षा सिर्फ उन्हीं लोगों को प्रदान की जाएगी, जिन्हें वास्तविक खतरे की पुष्टि होगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि सुरक्षा व्यवस्था का दुरुपयोग रोकने और पुलिस बल की प्रभावी तैनाती सुनिश्चित करने के लिए ऐसे समीक्षा अभियान नियमित रूप से जारी रहेंगे।
कुछ दिन पहले भी हरियाणा पुलिस ने दिग्विजय चौटाला, देवेंद्र कादियान और पूर्व एडीजीपी परमजीत अहलावत (जो दुष्यंत चौटाला के ससुर हैं) की सुरक्षा वापस ले ली थी।
डीजीपी का नया निर्देश: गुंडागर्दी से खतरा है तो दें सहायता, पर अनावश्यक सुरक्षा न दें
डीजीपी ने सभी जिलों के पुलिस अधिकारियों को विस्तृत दिशा-निर्देश जारी करते हुए कहा है कि जिन नागरिकों को बदमाशों या अपराधियों से वास्तविक खतरा है, उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की जाए और उनसे निरंतर संपर्क बनाए रखा जाए। जरूरत पड़ने पर उन्हें हथियार लाइसेंस, ट्रेनिंग और सुरक्षा उपायों की जानकारी भी प्रदान की जाए।
उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि किसी भी व्यक्ति को प्राइवेट सुरक्षा देने से पहले सीआईडी की थ्रेट असेसमेंट रिपोर्ट अनिवार्य होगी।
“पुलिस का काम अपराधियों से लड़ना है, घरों के बाहर पहरेदारी करना नहीं” : DGP
ओ.पी. सिंह ने सख्त लहजे में कहा कि पुलिस बल सीमित है और यदि बड़ी संख्या में कर्मियों को कुछ व्यक्तियों के घरों के बाहर बैठा दिया जाए, तो आम जनता की सुरक्षा कमजोर हो जाएगी।
उन्होंने चेतावनी दी कि:
- पुलिस सुरक्षा का दिखावा करने वाले लोगों को तुरंत ब्लैकलिस्ट किया जाएगा।
- कुछ लोग अपराधियों को शरण देते हैं और बाद में सुरक्षा मांगते हैं—ऐसे लोगों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई होगी।
यह निर्णय राज्य में वीआईपी कल्चर कम करने, पुलिस संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करने और आम नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।







