गुरुग्राम | प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मनी लॉन्ड्रिंग के एक मामले में अंसल प्रॉपर्टीज एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड पर बड़ी कार्रवाई की है। एजेंसी ने कंपनी से जुड़ी गुरुग्राम, ग्रेटर नोएडा और लुधियाना में स्थित छह अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से अटैच किया है। इन संपत्तियों की कीमत लगभग 10.55 करोड़ रुपये बताई जा रही है।
किसके नाम पर हैं संपत्तियां?
ईडी के मुताबिक, अटैच की गई संपत्तियां कंपनी से जुड़े निदेशकों और लाभार्थियों — सुशील अंसल, प्रणव अंसल एंड सन्स एचयूएफ और कुसुम अंसल — के नाम पर दर्ज हैं। यह मामला पर्यावरणीय कानूनों के गंभीर उल्लंघन से जुड़ा है।
आरोप: प्रदूषण नियंत्रण मानकों की अनदेखी
हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (HSPCB) ने कंपनी पर जल प्रदूषण नियंत्रण अधिनियम, 1974 और वायु प्रदूषण नियंत्रण अधिनियम, 1981 के उल्लंघन के मामले दर्ज किए थे। इन्हीं शिकायतों के आधार पर ईडी ने धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत जांच शुरू की।
जांच में सामने आया कि कंपनी के दो बड़े प्रोजेक्ट्स — ‘सुषांत लोक फेज-1’ और ‘एसेंसिया’ — में गंभीर अनियमितताएं की गईं।
- सुषांत लोक फेज-1: यहां सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) लगाया ही नहीं गया।
- एसेंसिया: यहां लगाया गया एसटीपी मानक क्षमता से काफी छोटा और अप्रभावी था।
जांच में क्या निकला सामने?
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि प्रोजेक्ट्स में लगे एसटीपी बिल्कुल निष्क्रिय छोड़ दिए गए थे और उनका संचालन-रखरखाव नहीं किया जा रहा था। ईडी के अनुसार, कंपनी ने बिना ट्रीटमेंट किए सीवेज और घरेलू अपशिष्ट सीधे HUDA की सीवर लाइन में छोड़ा, जिससे जनस्वास्थ्य और पर्यावरण पर गंभीर असर पड़ा।
जांच रिपोर्ट के मुताबिक, इस अवैध गतिविधि से कंपनी ने करीब 10.55 करोड़ रुपये का मुनाफा कमाया। ईडी ने इस राशि को “प्रोसीड्स ऑफ क्राइम” (अपराध से अर्जित संपत्ति) घोषित किया है।
प्रमोटर्स की जिम्मेदारी पर सवाल
ईडी का कहना है कि कंपनी के प्रमोटर्स ने न तो प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मानकों का पालन किया और न ही गंदे पानी के ट्रीटमेंट की कोई गंभीर कोशिश। एजेंसी ने आरोप लगाया कि मुनाफे के लिए जानबूझकर पर्यावरणीय नियमों की अनदेखी की गई और जनता की सेहत से खिलवाड़ किया गया।
आगे की कार्रवाई
एजेंसी ने स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई प्रारंभिक स्तर पर है और मामले की विस्तृत जांच अभी जारी है। ईडी अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस गैरकानूनी कमाई से जुड़े अन्य लेन-देन और निवेश कहां किए गए।







