चंडीगढ़ | केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह द्वारा आयोजित डिनर को लेकर हरियाणा की सियासत में हलचल तेज हो गई है। डिनर की सुर्खियों के बाद अब मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी का खेमा पूरी कोशिश में है कि इस घटनाक्रम से सरकार की छवि पर कोई असर न पड़े। भले ही इसे एक ‘सामान्य भोज’ बताया जा रहा हो, लेकिन अंदरूनी राजनीतिक समीकरणों में हलचल साफ महसूस की जा रही है।
तीसरी बार भीतरघात जैसे हालात
हरियाणा में भाजपा के 10 साल के शासन में यह तीसरा मौका है, जब भीतर से सरकार को चुनौती जैसी स्थिति देखने को मिली है। इससे पहले मनोहर लाल सरकार के पहले कार्यकाल में भी कुछ विधायकों की बगावत जैसी खबरें सामने आई थीं, जिन्हें बाद में संभाल लिया गया था।
सूत्रों के मुताबिक, डिनर में शामिल 6 विधायकों ने मुख्यमंत्री से मुलाकात कर स्पष्ट किया है कि यह एक गैर-राजनीतिक और सामान्य आयोजन था, जिससे किसी सियासी मकसद को न जोड़ा जाए।
कौन-कौन विधायक पहुंचे सीएम हाउस?
मुख्यमंत्री नायब सैनी से मिलने वालों में ये विधायक शामिल रहे:
- मुकेश शर्मा (गुरुग्राम)
- तेजपाल तंवर (सोहना)
- डॉ. कृष्ण (बावल)
- ओम प्रकाश यादव (नारनौल)
- सुनील सांगवान (चरखी दादरी)
- उमेद पातुवास (बाढ़ड़ा)
जानकारी के अनुसार, दो विधायकों को मुख्यमंत्री कार्यालय से बुलावा भेजा गया था, जबकि चार विधायक खुद ही सफाई देने पहुंचे।
‘सिर्फ एक संयोग’ बताकर पल्ला झाड़ा
विधायकों ने अपनी मुलाकात में बताया कि राव इंद्रजीत के डिनर में उनका शामिल होना सिर्फ एक संयोग था और इसका कोई राजनीतिक उद्देश्य नहीं था। हालांकि, सियासी विश्लेषकों का मानना है कि राजनीति में ऐसे भोज और मुलाकातें अक्सर किसी गहरे संदेश की ओर इशारा करती हैं।
अहीरवाल राजनीति में हलचल
भले ही विधायक इसे संयोग बताएं, लेकिन जानकारों का कहना है कि डिनर में शामिल विधायक अब ‘अहीरवाल के राजा’ यानी राव इंद्रजीत के करीबी के तौर पर देखे जा रहे हैं। चर्चाएं ये भी हैं कि जल्द ही ये विधायक पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल से भी मुलाकात कर सकते हैं।
राव इंद्रजीत और मनोहर लाल खट्टर के बीच के पुराने राजनीतिक समीकरण भी अब फिर चर्चा में हैं। आने वाले दिनों में इस डिनर का असली सियासी मकसद क्या था, ये तस्वीर और साफ हो सकती है।







