हरियाणा | हरियाणा में जल संकट को देखते हुए सरकार अब गंगा नदी के पानी को राज्य तक लाने की दिशा में कदम बढ़ा रही है। एसवाईएल नहर विवाद के बाद अब मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व में राज्य सरकार ने गंगा जल को हरियाणा तक लाने की संभावनाओं पर गंभीरता से काम शुरू किया है।
सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग को गंगा जल आपूर्ति के तमाम विकल्पों पर योजना तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। विभाग की ओर से चीफ इंजीनियर वीरेंद्र सिंह की अगुवाई में एक उच्चस्तरीय समिति का गठन किया गया है, जो उत्तर प्रदेश के अधिकारियों के साथ संभावित चैनलों पर चर्चा कर रही है।
मनोहर लाल के विजन को आगे बढ़ा रही सैनी सरकार
पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने 2022 में गंगा-यमुना लिंक नहर के लिए केंद्र और यूपी सरकार को पत्र लिखकर पहल की थी, जो अब मौजूदा सरकार की प्राथमिकता बन चुकी है। नई समिति एक महीने के भीतर रिपोर्ट सौंपेगी, जिसके आधार पर केंद्र सरकार और यूपी से आगे बातचीत की जाएगी।
यूपी से मिले ये पांच विकल्प
उत्तर प्रदेश की ओर से गंगा जल आपूर्ति के लिए हरियाणा को पांच संभावित चैनल बताए गए हैं:
- खतौली के पास हिंडन बैरियर
- बदरूद्दीन नगर
- मुरादनगर
- यमुनानगर के चैनल
क्यों जरूरी है गंगा का पानी?
राज्य सरकार के अनुसार एनसीआर क्षेत्र के गुरुग्राम और फरीदाबाद जिलों में पीने के पानी की भारी किल्लत है। अगर हरियाणा को गंगा से पानी मिल जाता है, तो यह न सिर्फ इन जिलों बल्कि दिल्ली की भी बड़ी जरूरत को पूरा कर सकता है। एसवाईएल मुद्दे पर पंजाब के अड़ियल रुख के चलते हरियाणा को वैकल्पिक उपाय अपनाने पर मजबूर होना पड़ा है।
2031 तक पूरा करने का लक्ष्य
गंगा जल लाने की योजना को यदि मंजूरी मिलती है, तो इसे 2031 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। योजना के तहत गंगा का पानी पहले यमुना में डाला जाएगा और फिर हरियाणा तक पहुंचाया जाएगा, जिससे यमुना पर निर्भरता घटेगी।
जल संसाधन मंत्री श्रुति चौधरी ने अधिकारियों को इस परियोजना से जुड़ी सभी संभावित तकनीकी, वित्तीय और भौगोलिक चुनौतियों की विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए हैं, ताकि भावी चर्चाओं में समाधान के विकल्प सामने रखे जा सकें।







