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जींद में महिला उत्पीड़न और सामाजिक मुद्दों पर सुभाषिनी अली का तीखा प्रहार, कहा- “हरियाणा में अपराधियों को सत्ता का संरक्षण”

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जींद  | अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति का 12वां राज्य स्तरीय सम्मेलन रविवार को जींद के एक निजी होटल में संपन्न हुआ। सम्मेलन में पूर्व सांसद और समिति की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सुभाषिनी अली सहगल ने शिरकत की। सुभाषिनी, स्वतंत्रता सेनानी लक्ष्मी सहगल की पुत्री हैं और नेताजी सुभाष चंद्र बोस की आज़ाद हिंद फौज से भी पारिवारिक जुड़ाव रखती हैं।

महिला उत्पीड़न पर खुलकर बोलीं सुभाषिनी

पंजाब केसरी से विशेष बातचीत में सुभाषिनी अली ने देशभर में बढ़ते महिला उत्पीड़न, राजनीतिक संरक्षण और सामाजिक रूढ़ियों पर बेबाकी से अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार में अपराधियों को राजनीतिक संरक्षण मिलता है। उन्होंने राम रहीम के उदाहरण का हवाला देते हुए कहा, “बलात्कार और हत्या जैसे गंभीर मामलों में दोषी व्यक्ति को बार-बार पैरोल मिलना शर्मनाक है। भाजपा नेता उसके पास जाकर चुनावी मदद मांगते हैं।”

संदीप सिंह पर कार्रवाई से बचती रही सरकार”

हरियाणा के पूर्व खेल मंत्री संदीप सिंह के खिलाफ शिकायतों पर उन्होंने कहा कि महिला की शिकायत के बावजूद भाजपा सरकार ने कोई कठोर कदम नहीं उठाया। मुख्यमंत्री बदलने के बावजूद स्थिति में कोई बदलाव नहीं आया।

खाप पंचायतों और सामाजिक कुरीतियों पर तीखी टिप्पणी

सुभाषिनी ने खाप पंचायतों द्वारा लिव-इन रिलेशनशिप, समगोत्र विवाह और एक ही गांव में शादी पर रोक जैसे फैसलों की आलोचना की। उन्होंने कहा कि हरियाणा में लिंगानुपात असंतुलित है, जिससे कई युवा दूसरे राज्यों से लड़कियां लाकर विवाह कर रहे हैं। लेकिन जब कोई लड़की अपनी मर्जी से शादी करती है तो उसे सामाजिक बहिष्कार का सामना करना पड़ता है।

हरियाणा में महिला उत्पीड़न की दर बहुत अधिक”

एनसीआरबी के आंकड़ों का हवाला देते हुए सुभाषिनी ने कहा कि महिला उत्पीड़न के अधिकांश मामले रिपोर्ट ही नहीं होते। उन्होंने कहा, “हरियाणा में 75% से अधिक मामले थानों तक पहुंच ही नहीं पाते।”

महिला पहलवानों के आंदोलन में रही सक्रियता

उन्होंने बताया कि उनकी समिति ने जंतर-मंतर पर महिला पहलवानों के आंदोलन में भाग लिया। उन्होंने कहा कि इन घटनाओं के बाद कई परिवार अपनी बेटियों को खेलों में भेजने से डरने लगे हैं।

किसान आंदोलन में महिलाओं की भागीदारी

जींद शुगर मिल के बाहर हुए किसान आंदोलन को याद करते हुए उन्होंने कहा कि उस समय जात-पात भुलाकर पूरे गांव ने एकजुटता दिखाई। “हर घर से रोटियां आईं और कोई यह नहीं पूछ रहा था कि रोटी किस जाति की है।”

दहेज प्रथा और सामाजिक बदलाव

सुभाषिनी ने कहा कि अब टीवी और विज्ञापनों ने सामाजिक दबाव बढ़ा दिया है। “अब लोग सोचते हैं कि अगर बेटी को दहेज में कार नहीं दी तो उसका मान नहीं रहेगा।”

मोबाइल और पोर्न की भूमिका पर सवाल

उन्होंने कहा कि बलात्कार के पीछे महिला के कपड़े नहीं, बल्कि समाज में फैली यौन कुंठा और पोर्न सामग्री एक बड़ी वजह है। “90% पुरुष पोर्न देखते हैं और फिर उसका असर उनके व्यवहार में दिखता है।”

राजनीति में महिलाओं की चुप्पी पर चिंता

उन्होंने कहा, “जो महिलाएं पार्टी की मेहरबानी से विधायक या सांसद बनी हैं, वे महिला मुद्दों पर चुप रहती हैं, क्योंकि उन्हें डर रहता है कि टिकट कट सकता है।”

 

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