चंडीगढ़ | पानी के मुद्दे पर एक बार फिर से पंजाब और हरियाणा के बीच टकराव बढ़ गया है। पहले जहां सतलुज-यमुना लिंक (SYL) नहर को लेकर दोनों राज्यों में सियासी जंग होती थी, वहीं इस बार विवाद भाखड़ा नहर के पानी को लेकर छिड़ा है। गर्मी के मौसम के साथ अब सियासी माहौल भी गर्म हो गया है, दोनों ओर से तीखे बयान और आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है।
पंजाब ने भाखड़ा नहर से हरियाणा के हिस्से में करीब 5 हजार क्यूसिक पानी की कटौती कर दी है। हरियाणा को सामान्यतः 9 हजार क्यूसिक पानी मिलना चाहिए, लेकिन अब केवल 4 हजार क्यूसिक पानी दिया जा रहा है। इससे अंबाला, कैथल, कुरुक्षेत्र, जींद, फतेहाबाद, हिसार और सिरसा जिलों में जल संकट गहरा गया है। ग्रामीण क्षेत्रों में लोग टैंकरों से पानी मंगवाने को मजबूर हैं और टैंकरों की कीमतें तीन गुना तक बढ़ गई हैं।
भाखड़ा नहर और हरियाणा की सिंचाई व्यवस्था
भाखड़ा-नंगल परियोजना के तहत पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और राजस्थान को पानी सप्लाई होता है। नहर के जरिए हरियाणा में लगभग 14.27 लाख हैक्टेयर भूमि की सिंचाई होती है। इसके अलावा, पश्चिमी यमुना नहर भी हरियाणा की एक बड़ी सिंचाई व्यवस्था का हिस्सा है, जो 7.76 लाख हैक्टेयर भूमि को पानी देती है।
इतिहास की बात करें तो 1963 में भाखड़ा बांध के तैयार होने के बाद हरियाणा को सतलुज नदी का पानी मिलना शुरू हुआ। वहीं नहर प्रणाली की नींव 14वीं सदी में फिरोजशाह तुगलक ने पश्चिमी यमुना नहर बनाकर रखी थी।
खेती के बदले स्वरूप ने बढ़ाई पानी की मांग
हरित क्रांति के बाद पंजाब और हरियाणा में खेती का तरीका पूरी तरह बदल गया है। पंजाब में धान का रकबा 1960 के मुकाबले 14 गुना बढ़ गया है और अब यह 28 लाख हैक्टेयर तक पहुंच गया है। वहीं हरियाणा में भी नलकूपों की संख्या 30 गुना बढ़ी है, जिससे भूजल दोहन चरम पर पहुंच गया है। इससे नदियों और बांधों पर निर्भरता भी बढ़ गई है।
सियासी मोर्चेबंदी तेज
हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान से फोन पर बात करने के साथ-साथ पत्र भी लिखा है, लेकिन समाधान नहीं निकल सका। सैनी ने कहा कि यदि पंजाब को पानी की जरूरत पड़ी तो हरियाणा अपने हिस्से का पानी काटकर भी मदद करेगा, लेकिन पीने के पानी पर राजनीति नहीं होनी चाहिए।
उधर, पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने आरोप लगाया कि हरियाणा और राजस्थान की भाजपा सरकारों ने भाखड़ा ब्यास मैनेजमेंट बोर्ड में मिलकर निर्णय अपने पक्ष में करवाया। मान का कहना है कि पंजाब के पानी पर पंजाबियों का पहला हक है।
केंद्रीय मंत्री के दखल के बावजूद नहीं सुलझा विवाद
केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर के हस्तक्षेप के बाद भाखड़ा ब्यास मैनेजमेंट बोर्ड की आपात बैठक हुई, जिसमें हरियाणा को 8,500 क्यूसिक पानी देने का फैसला लिया गया। लेकिन पंजाब ने इस निर्णय को मानने से इनकार कर दिया और नंगल डैम के कंट्रोलिंग स्टेशन तक पुलिस तैनात कर दी गई, जिससे स्थिति और तनावपूर्ण हो गई है।
हरियाणा में सियासी दलों की एकजुटता
पानी के मुद्दे पर हरियाणा के नेता एकजुट नजर आ रहे हैं। विपुल गोयल, श्रुति चौधरी, भूपेंद्र सिंह हुड्डा, रणदीप सुरजेवाला, कुमारी शैलजा, अभय चौटाला और मोहनलाल बड़ोली सहित तमाम बड़े नेताओं ने हरियाणा के हिस्से का पानी देने की मांग की है।







