पलवल, 15 मार्च-पलवल जिले के गांवों व शहरी क्षेत्र में धुलैंडी का त्यौहार जहां हर्षोल्लास के साथ मनाया गया।वहीं, ब्रज के गांव सौन्दहद व बंचारी में ऐतिहासिक फूलडोर मेले को बृजवासियों ने 3 से 4 फिट की पिचकारियों से रंग बरसा कर धूमधाम से मनाया। मेले को देखने के लिए ब्रज क्षेत्र के अलावा दूर दराज के गांवोंं से हजारों की संख्या में दर्शक गांव बंचारी व सौन्दहद पहुंचे। शनिवार की सुबह से गांवो में मनाए जाने वाले फूलडोर के मेले पर हुरियारों ने पीतल और स्टील व लोहे की 3 से 4 फिट की बडी बडी पिचकारियों से चौपालों पर खडे होकर गांव पहुंचने वाले दर्शकों को होली के रंग में सराबोर कर दिया।
धुलेंडी के बाद पलवल जिले के गांव सौन्दहद व बंचारी में ऐतिहासिक फूलडोर मेले को बृजवासियों ने 3 से 4 फिट की पिचकारियों से रंग बरसा कर धूमधाम से मनाया। गांव सौंध में 40 चौपालों पर तो वहीं बंचारी में 30 चौपालों पर एक दूसरे पर कंपीटीशन से जमकर रंग बरसाया गया। गांवो की पंचायत ने गांवो में पहुंचने पर बंचारी के सरपंच सीताराम व सौन्दहद के सरपंच तुहीराम सहित सैकड़ो ग्रामीणो द्वारा रंग गुलाल आदि लगाकर स्वागत किया गया। वहीं, मेले में अप्रिय घटना को रोकने के लिए भारी संख्या में पुलिस बल तैनात रहा ।
दाऊजी महाराज मन्दिर के प्रांगण से फूलडोर मेले का शुभारंभ
दरअसल, शनिवार की सुबह से गांवो में मनाए जाने वाले फूलडोर के मेले पर हुरियारों ने पीतल और स्टील व लोहे की 3 से 4 फिट की बडी बडी पिचकारियों से चौपालों पर खडे होकर गांव पहुंचने वाले दर्शकों को होली के रंग में सराबोर कर दिया। गांव सौंदहद में पक्की चौपाल से फूलडोर मेले की शुरुआत की गई तो वहीं गांव बंचारी में ऐतिहासिक भगवान कृष्ण के बड़े भाई दाऊजी महाराज मन्दिर के प्रांगण से फूलडोर मेले का शुभारंभ किया गया। यहां हुरियारों ने कौन गांव के कुमर कन्हैया कौन गांव की गोरी रे रसिया, नन्दगांव के कुमर कन्हैया और बरसाने की गोरी रे रसिया जैसे विभिन्न रसिया प्रस्तुत किए और ढोल नगाडों की धुन पर जमकर नृत्य किया। मेले में निकलने वाले हुरियारे सभी दर्शकों को बडी बडी पिचकारियों से रंगों में सरावोर करते चले जाते हैं। फूलडोर मेले में परम्परा के अनुसार दो पार्टियांं बनाई जाती हैं,जो एकपर पीतल व तांबे आदि की बनी पिचकारियों से जमकर रंग बरसाते हैं।
फूलडोर मेले में हजारों महिला पुरुषों ने लिया हिस्सा
मेला देखने के लिए बाहर से आने वाले मेहमानों और दर्शकों के लिए गांव की सभी चौपालों पर भी खानपान की पूरी व्यवस्था रहती है। महिलाऐं भी रंग बिरंगे कपडे व सोने -चांदी के आभूषणों से परिपूर्ण रहती हैैं तथा होली के मेले में फाग ,रसिया आदि गाकर जमकर नृत्य करती हैं। बंचारी गांव में लगने वाले फूलडोर मेले में विदेशों में अपने हुनर का डंका बजाने वाली भजन गायन पार्टी के कलाकारों ने होली के फाग प्रस्तुत कर सभी दर्शकों को वाहवाह कहने को मजबूर कर दिया। ग्रामीणों ने मेले में पहुंचे देश विदेश के मेहमानों का जहां रंग गुलाल से स्वागत किया तो वहीं अनेक प्रकार के व्यंजनों के साथ उन्हें दावत भी दी। ग्रामीण महिला व पुरुष सुबह से ही चौपालों पर एकत्रित होना शुरू हो गए। गांव की प्रत्येक चौपाल पर ड्रमों में रंग व गुलाल रखा गया, जहां सेे हुरियरों नेे पिचकारियों में रंग भरकर एक दूसरे पर बरसाया। फूलडोर के मेले के दौरान यहां दो पार्टियांं बनाई जाती हैं जो एक दूसरे पर पीतल व तांबे आदि की बनी पिचकारियों से जमकर रंग बरसाते हैं। मेले के दौरान महिलाओं के साथ युवा और पुरुषों ने भी होली के फाग और रसियाओं की धुन पर जमकर नृत्य किया।







