अम्बाला, 1 मार्च -देश की सीमाओं पर तैनात होकर भारत की जनता को चैन की नींद देने वाले अंबाला के कैडेट सुमित धीमान को शौर्य चक्र से नवाजा गया है. जिसके बाद से ही परिवार में खुशी की लहर है. दरअसल सुमित धीमान ने अपनी जान की परवाह किए बिना डूबते जहाज से खराब मौसम के बीच 23 लोगों को रेस्क्यू किया था।
डूबते जहाज से खराब मौसम के बीच 23 लोगों को किया था रेस्क्यू
जांबाज कमांडेंट को 25 फरवरी को रक्षामंत्री द्वारा सम्मानित किया है, जिनमें से एक अंबाला का बेटा सुमित धीमान भी है.सुमित ने साल 2007 में अपनी नौकरी की शुरुआत की थी और बचपन से ही उन्हें शिप बनाकर देश की सेवा करने का शौक था.साल 2021 में एक डूबता जहाज को देखते हुए कमांडेंट सुमित ने अपनी जान की परवाह किए बिना उसे जहाज में डूब रहे लोगों की जान बचाई बताया गया कि वह वक्त ऐसा था.जब काफी तेज तूफान था और उसे तूफान के बीच हेलीकॉप्टर की मदद से उसे डूबते जहाज में से लगभग 23 लोगों को रेस्क्यू करके सुमित ने उन सब को एक नया जीवन दिया था.उनके काम को देखते हुए उन्हें शौर्य पदक से सम्मानित किया गया है।उनकी इस कामयाबी को देखते हुए उनके परिवार और रिश्तेदार काफी खुश दिखाई दे रहे हैं.
सुमित के माता-पिता का कहना है कि बचपन से ही उनके बेटे को यह शौंक था कि उसे देश की रक्षा करनी है और उसने अपना यह सपना पूरा कर दिखाया. जब उनके बेटे को शौर्य चक्र से नवाजा गया.उस वक्त परिवार की आंखों में खुशी की आंसू थे और उन्हें अपने बेटे पर काफी गर्म महसूस हो रहा था. वही उनके भाई ने बताया कि सुमित तुमसे छोटा है लेकिन जैसे जांबाज वाले काम वह कर रहा है उसे वह कामों में उनके लिए वह बहुत बड़ा हो गया है उनके परिवार को सुमित पर गर्व है जो अपनी जान की परवाह किए बिना भी देश की रक्षा में लगा हुआ है और कई लोगों को नया जीवनदान भी दे चुका है।







