हिसार, 14 दिसंबर —हिसार गौरव नाम का क्लोन मुर्रा झोटा सुर्खियों में है। इस क्लोन झोटे को सीआईआरबी ने ही तैयार किया है। इसकी उम्र 10 साल हो गई है।परियोजना प्रभारी डॉक्टर प्रेम सिंह यादव ने बताया कि जिस भी प्रदेश में भैंस अधिक हैं वहां दूध का उत्पादन भी अधिक होता है।भैंसों की नस्ल को सुधारने में कृत्रिम गर्भाधान ने बहुत महत्वपूर्ण योगदान दिया है।जिस भी प्रदेश ने कृत्रिम गर्भाधान को तेजी से अपनाया है वहां दूध की बढ़ोतरी भी अधिक हुई है।
जिस भी प्रदेश ने कृत्रिम गर्भाधान को तेजी से अपनाया… वहां दूध की बढ़ोतरी भी हुई अधिक
डॉक्टर प्रेम सिंह यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पशुओं में सौ प्रतिशत कृत्रिम गर्भाधान विधि की पहल की है।इसलिए सीमन की मांग भी तेजी से बढ़ी है।उच्च गुणवत्ता वाले झोटों की मांग को पूरा करने के लिए बड़ी मात्रा में अच्छे झोटों को उत्पन्न करवाना होता है।डॉक्टर प्रेम सिंह यादव ने कहा कि विज्ञान ने आज इतनी तरक्की कर ली है कि हम क्लोन विधि से अच्छी नस्ल के झोटे तैयार करवा सकते हैं।क्लोन विधि में पशु के टिश्यू से एक छोटा सोमेटिक सैल लेकर उसे डोनर सैल में बदलकर प्रयोग करते हैं।जिस भी पशु से डोनर टिश्यू लिया जाता है सारे गुण क्लोन के अंदर उसी पशु के आते हैं।हिसार गौरव नाम के क्लोन ने वर्ष 2014 में जन्म लिया था।उन्होंने कहा कि वर्तमान में क्लोन विधि को और भी आगे बढाया गया है।भारत सरकार से भी आग्रह किया गया है कि इस विधि को अब देशभर में भी अपनाया जाना चाहिए।उच्च गुणवत्ता वाले झोटे के सीमन की अन्य देशों में मांग के सवाल पर उन्होंने कहा कि इसके ऊपर भारत सरकार निर्णय लेती है।
डॉक्टर प्रेम सिंह ने बताया कि क्लोन विधि द्वारा तैयार किए झोटे गौरव का सीमन उन पशुपालकों को भी उपलब्ध करवाया गया जो हमारी रिसर्च में शामिल थे। इन झोटों की देखभाल सामान्य पशुओं से अधिक करनी पड़ती है।इनका विशेष ध्यान रखा जाता है।इन्हें कम टीडीएस का पानी पिलाया जाता है व उसी पानी से नहलाया जाता है। हमारे अनुसंधान में पशुओं के लिए न्यूट्रीशन विभाग ही निर्णय लेता है कि कितनी गुणवत्ता का खाना पशुओं को दिया जाए। उन्होंने बताया कि क्लोन विधि द्वारा पशु तैयार करने में भारत सरकार का महत्वपूर्ण योगदान रहता है।अनुदान भी भारत सरकार द्वारा ही उपलब्ध करवाया जाता है। उन्होंने बताया कि देश के सभी सीमन उत्पादक केंद्र भारत सरकार की निगरानी में रहते हैं। इन केंद्रों पर पशुओं की अच्छी गुणवत्ता के सीमन उपलब्ध रहते हैं। पशुओं में कृत्रिम गर्भाधान अपनाने से बीमारियों का खतरा भी काम रहता है।पशुपालकों को सलाह देते हो उन्होंने कहा कि पशुओं की अच्छी नस्ल के लिए कृत्रिम गर्भाधान को अपनाना चाहिए जिससे दूध उत्पादन में भी निश्चित रूप से बढ़ोतरी होगी।







