23 सितम्बर, सोनीपत : सोनीपत में आज कांग्रेस को बड़ा झटका लगा है । पूर्व विधायक एवं पूर्व सीएम भूपेंद्र हुड्डा के करीबी रहे जयतीर्थ दहिया ने पार्टी छोड़ दी है। उन्होंने आरोप लगाए कि राई की टिकट में पैसों का लेन देन हुआ है। उन्होंने कहा कि उनकी टिकट कटवाने और उनको जलील करने में दोनों बाप बेटों (भूपेंद्र सिंह हुड्डा और दीपेंद्र हुड्डा) का रोल है। दोनों ने कांग्रेस की हवा खराब कर दी है। वे चुनाव के बाद अब आगे का फैसला लेंगे। समर्थकों को उनका संदेश पहुंच गया है कि वे अब कांग्रेस में नहीं हैं।
जयतीर्थ दहिया राई विधानसभा सीट से वर्ष 2009 व वर्ष 2014 में लगातार 2 बार कांग्रेस के विधायक रहे हैं। उनके पिता चौ. रिजक राम दहिया 1972 में कांग्रेस की टिकट पर और 1977 में जनता पार्टी की टिकट पर विधायक बने। वे मंत्री भी रहे। जयतीर्थ ने 3 दशकों से ज़्यादा समय तक सोनीपत कोर्ट में वकालत की। 2014 के चुनाव में इनेलो के इंद्रजीत से मात्र 3 वोटों से चुनाव जीते थे। 5 साल पहले उन्होंने अशोक तंवर पर गाली देने का आरोप लगा कर इस्तीफा दे दिया था। इस बार उनको टिकट नहीं मिली।
जयतीर्थ दहिया ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि 2009 में वे भूपेंद्र हुड्डा के सहयोग से विधायक बने थे,लेकिन आज के दिन जो हालात चल रहे हैं, जिस तरीके से पैसों का लेनदेन हुआ है, पैसों से ही टिकट बांटे गए हैं, उससे मैं समझता हूं कि पार्टी की जो हवा थी, उस पर काफी असर पड़ा है। कांग्रेस ने उनकी अनदेखी की है। विधानसभा में जहां तक उनको पता है, पैसों का खूब लेन-देन हुआ है। पैसे के बेस पर टिकट बांटी गई हैं। फिलहाल मैंने पार्टी छोड़ दी है।उन्होंने बताया कि वे हुड्डा साहब के पास गए थे। उसने कुछ कैंडिडेट के नाम गिनाए थे। तब भूपेंद्र हुड्डा ने उनको कहा था कि आप इन कैंडिडेट की परवाह मत करो, यह तो आपके आगे कुछ भी नहीं हैं। और आपका पैरोकार तो मैं हूं, आपको क्या जरूरत है चिंता करने की। उन्होंने कहा कि उनके साथ विश्वासघात किया गया है। टिकट कटने के बाद भूपेंद्र हुड्डा या दीपेंद्र ने उनसे कोई संपर्क नहीं किया। वे हुड्डा परिवार के करीब थे, लेकिन पैसों के आगे सब कुछ खत्म हो गया।







