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शिक्षिका मनीषा मौत मामले में अब भी बरकरार रहस्य, CBI ने स्टेटस रिपोर्ट के लिए मांगा दो माह का समय

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भिवानी। ढाणी लक्ष्मणपुर निवासी शिक्षिका मनीषा की संदिग्ध मौत का मामला करीब दस माह बाद भी अनसुलझा बना हुआ है। मामले की जांच कर रही केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को 9 जून तक अपनी स्टेटस रिपोर्ट अदालत में प्रस्तुत करनी थी, लेकिन एजेंसी ने जांच पूरी करने के लिए अतिरिक्त समय की मांग की है। इसके बाद पंचकूला स्थित CBI कोर्ट ने रिपोर्ट जमा करने की नई तारीख 14 अगस्त निर्धारित की है।

मनीषा के पिता संजय कुमार ने बताया कि परिवार ने जांच की प्रगति जानने के लिए अदालत में याचिका दायर की थी। इसी दौरान जानकारी मिली कि CBI ने स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने के लिए दो माह का अतिरिक्त समय मांगा है। उनका कहना है कि अब रिपोर्ट सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि जांच में क्या तथ्य सामने आए हैं और मनीषा की मौत आत्महत्या थी या फिर हत्या।

संजय कुमार ने कहा कि उनकी बेटी को न्याय दिलाने की लड़ाई लगातार जारी है। उन्होंने बताया कि 7 जून को आयोजित महापंचायत में सरकार और CBI को मामले में ठोस प्रगति दिखाने के लिए 21 दिन का समय दिया गया था। महापंचायत में गठित कमेटी ने निर्णय लिया था कि यदि 29 जून तक मामले में कोई महत्वपूर्ण खुलासा नहीं होता, तो भिवानी उपायुक्त कार्यालय के बाहर अनिश्चितकालीन अनशन शुरू किया जाएगा।

मृतका के पिता का आरोप है कि CBI अधिकारियों ने कुछ समय पहले उनसे बातचीत के दौरान 15 दिन में स्थिति स्पष्ट करने का भरोसा दिया था, लेकिन वह समय भी बीत चुका है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि जांच पूरी हो चुकी है तो रिपोर्ट सार्वजनिक करने में देरी क्यों की जा रही है। उनके अनुसार इस मामले में सच्चाई सामने आनी चाहिए और दोषियों को सजा मिलनी चाहिए।

गौरतलब है कि ढाणी लक्ष्मणपुर की रहने वाली मनीषा सिंघानी एक प्ले स्कूल में शिक्षिका के रूप में कार्यरत थीं और आगे नर्सिंग की पढ़ाई करने की तैयारी कर रही थीं। 11 अगस्त 2025 को वह नर्सिंग कॉलेज में प्रवेश प्रक्रिया के लिए जाने की बात कहकर घर से निकली थीं, लेकिन वापस नहीं लौटीं। दो दिन बाद 13 अगस्त को उनका शव गांव सिंघानी के खेतों में संदिग्ध परिस्थितियों में मिला था। शव की हालत बेहद खराब थी, जिसके बाद परिजनों ने हत्या की आशंका जताते हुए मामला दर्ज कराया था।

मामले को लेकर क्षेत्र में व्यापक विरोध प्रदर्शन हुए थे। लोगों की मांग पर शव का तीन बार पोस्टमार्टम कराया गया था। प्रारंभिक पुलिस जांच में मामले को आत्महत्या बताया गया था, लेकिन जनदबाव और लगातार उठती मांगों को देखते हुए मुख्यमंत्री ने जांच CBI को सौंप दी थी। अब पूरे मामले में CBI की स्टेटस रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है, जिससे जांच की दिशा और निष्कर्षों पर तस्वीर साफ हो सकेगी।

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