जुलाना 21 अगस्त : जम्मू के उधमपुर जिले में सीआरपीएफ की गश्त के दौरान आतंकी हमले में शहीद हुए जींद के निडानी गांव के कुलदीप मलिक का आज राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। अंतिम संस्कार में पूरा गांव उमडा पर कोई भी बीजेपी का बड़ा नेता और विधायक नहीं पहुंचा।
शहीद कुलदीप मलिक के दोनों बेटे भी सेना में
कुलदीप मलिक सीआरपीएफ में इंस्पेक्टर के पद पर तैनात थे। कुलदीप मलिक के दोनों बेटे भी सेना में है। एक बेटा आर्मी में ड्राइवर के पद पर तैनात है तो दूसरा सीआरपीएफ में है।आज हरियाणा के जीन्द में हजारों लोगों ने नम आंखों से शहीद कुलदीप को अंतिम विदाई दी। शहीद का पार्थिव श*व तिरंगा के साथ लिपटा हुआ था। बंदूकों की सलामी के साथ उन्हे अंतिम विदाई दी गई। अंतिम विदाई का यह दृश्य अत्यंत भावुक और गर्वपूर्ण था। उनकी अंतिम यात्रा में हजारों लोग शामिल हुए। पूरा वातावरण जब तक सूरज चांद रहेगा कुलदीप मलिक तेरा नाम रहेगा के गगन बेदी नारों से गूंज रहा था।पिता की शहादत पर बेटे ने कहा हर रोज कोई न कोई अपना बेटा अपना पिता खो रहा है, पाकिस्तान से बदला लेना चाहिए हमले से पहले कुलदीप मलिक ने परिवार से कहा था। जब पापा से ये कहा कि पापा बच के ध्यान से रहना तो कुलदीप मलिक ने कहा था बहादुरों वाली जिंदगी जी है, वही जिएंगे.
बीजेपी का कोई भी बड़ा नेता और विधायक नहीं पहुंचा
गांव के लोगों का कहना है कि कुलदीप मलिक ने इतना बडा बलिदान दे दिया, लेकिन उनके अंतिम संस्कार बीजेपी का कोई भी बड़ा नेता और विधायक नहीं पहुंचा। यह एक शर्म की बात है.कुलदीप मलिक 34 साल पहले स्पोर्ट्स कोटे से कांस्टेबल के पद पर भर्ती हुए थे। कुलदीप मलिक कुस्ती के नेशनल खिलाडी रह चुके है। कुलदीप मालिक अगले महीने डीएसपी प्रमोट होने वाले थे। जम्मू-कश्मीर के उधमपुर में आतंकियों ने सोमवार को सीआरपीएफ के दल पर हमला किया। दोपहर बाद तीन बजे के बाद आतंकवादियों और सुरक्षाबलों के बीच मुठभेड़ हो गई। इसमें सीआरपीएफ और जम्मू-कश्मीर पुलिस के एसओजी के संयुक्त दल पर आतंकवादियों ने हमला कर दिया। इसमें जिले के गांव निडानी निवासी सीआरपीएफ इंस्पेक्टर कुलदीप मलिक बलिदान हो गए। इससे पहले सात अगस्त को भी उधमपुर के बसंतगढ़ क्षेत्र में सुरक्षाबलों और आतंकियों के बीच मुठभेड़ हुई थी। हालांकि आतंकी खराब मौसम और धुंध का फायदा उठाकर भागने में कामयाब रहे थे।
माना जा रहा है कि उधमपुर के बसंतपुर के ऊपर जंगल में आतंकियों के कुछ ग्रुप यहां बीते कुछ महीने से छिपे हुए हैं। लोग संदिग्ध देखे जाने की लगातार सूचना दे रहे हैं। इतने समय तक बिना गाइड व मददगारों के छिपना संभव नहीं है। सूत्रों की माने तो इन आतंकियों को किसी स्थानीय के यहां शरण मिल रही है। मौजूदा समय में गुज्जर-बकरवालों के कई डेरे जंगलों व पहाड़ों पर हैं। इनको धमकाकर आतंकी खाने का इंतजाम कर लेते हैं।







