जींद 12 अगस्त: जींद में आचार्य देववर्त ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा की किसान की प्रगती, उन्नति और समृद्धि और शर्तों,पानी को बचाने के लिए प्राकृतिक खेती की ओर आना पड़ेगा। धरती बंजर होती जा रही है । पानी का अभाव हो गया है। खेती में ढेर सारा डीएपी,यूरिया,कीटनाशक पड रहे हैं और लोग बीमार हो रहे हैं।कैंसर ,हार्ट ,अटैक शुगर जैसी बीमारियां बढ़ रही हैं। प्राकृतिक खेती में उत्पादन नहीं घटता। प्राकृतिक खेती, जैविक खेती से बिल्कुल अलग है। इसमें लागत लगती नहीं, उत्पादन घटता नहीं। किसान को ज्यादा मुनाफा मिलेगा , इसलिए आज के दिन प्राकृतिक खेती आज की जरूरत गई है। प्राकृतिक खेती ही किसान को विकास की ओर ले जा सकती है।किसानों को फ्री में प्राकृतिक खेती की ट्रेनिंग दी जाएगी। गुजरात में पौने 10 लाख किस प्राकृतिक खेती करते हैं। ऐसे ही पूरे देश में मुहिम चले।







