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धान की खेती को लेकर कृषि विभाग ने किसानों को किया जागरूक

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यमुनानगर 8 अगस्त : यमुनानगर में आज डीएसआर से की गई धान की खेती को लेकर कृषि विभाग ने किसानों को जागरूक किया ऐसे में किस बेअंत सिंह के फार्म हाउस पर किसने की एक बैठक की गई और बाद में किसानों को डीएसआर और पारंपरिक धान की खेती के बारे में अंतर बताया अगर किसान इस खेती को अपनाते हैं तो जाहिर सी बात है कि आने वाले समय में ना तो पानी की बर्बादी होगी और ना ही किसानों को अधिक मात्रा में यूरिया खेतों में डालना पड़ेगा यही नहीं डीएसआर द्वारा की गई खेती से धन से चावल भी दुगनी मात्रा में निकालने की बात कही जा रही है.
यमुनानगर के किसान बेअंत सिंह ने अपने खेतों में डीएसआर की मदद से धान की फसल लगाई थी हालांकि एक तरफ मजदूरों से खेतों में धान की पौध लगाई गई तो दूसरी तरफ डीएसआर मशीन से ऐसे में इन दोनों फसलों के बड़े होने के बाद आज इस पर एक वर्कशॉप का आयोजन किया गया जिसमें कृषि अधिकारी से लेकर आम किसान इस वर्कशॉप में एकत्रित हुए और खेतों का निरीक्षण भी किया जिसमें पाया गया कि व्यायाम सिंह द्वारा जो धान की फसल डीएसआर की मदद से लगाई गई थी उसमें किसानों को अधिक फायदा मिलने वाला है धान की फसल में देखने को मिला है कि जो पारंपरिक खेती की गई है उसमें कम और हुई है और जो डीएसआर से लगाई गई है उसमें कहीं ना कहीं झाड़ अधिक होगा पौधों में पाया गया है कि पारंपरिक खेती में 5 से 7 फलियां ही धान की पौध पर आई है और यह इसलिए किया गया था की आने वाले समय में डीएसआर की मदद से ही धान की फसल को पैदा किया जा सके किसान भी इस बात को लेकर अब यह कहते हुए दिखाई दे रहे हैं कि डीएसआर से सच में किसानों को फायदा होने वाला है क्योंकि ना तो इसमें ज्यादा मेहनत मजदूरी लगती है और ना ही ज्यादा फसल को पानी देना पड़ता है जबकि इसमें तो खाद की मात्रा भी काफी कम पाई जाती है जैसे किस को तो फायदा होगा ही साथ ही पैदा हुई फसल भी किसी को कोई नुकसान नहीं पहुंचने वाली…
बेअंत  सिंह की गिनती बड़े किसानों में आती है और यही कारण था कि कृषि विभाग ने बेअंत सिंह के साथ मिलकर एक एकड़ में डीएसआर द्वारा खेती की गई और दूसरे खेत में पारंपरिक खेती और आज इस डीएसआर के फायदा बताते हुए कृषि अधिकारी भी यह कह रहे थे कि इसमें किसानों को काफी फायदा होने वाला है क्योंकि अगर मजदूरों से धान की फसल लगाई जाए तो उसमें भारी भरकम पैसे भी मजदूरों को देने पड़ते हैं लेकिन यह मशीन या एक साथ धान को जमीन में लगाने का काम करेगी तो वहीं दूसरी तरफ साथ ही खाद भी एक साथ ही जमीन में डाला जाएगा यही नहीं पानी की मात्रा भी काम खत्म होगी फिलहाल आज इस फसल को देखकर आपके किसानों का भी यही मन है कि आने वाले समय में वह डीएसआर से ही धान की फसल लगाने का काम करेंगे लेकिन ऐसे में किसानों मैं सरकार से मांग की है कि वह इस मशीन को लगाने के लिए किसानों की मदद करें जिससे किसान ऑन इस मशीन को खरीद सके और इस मशीन के फायदे भी ले सके।

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