अम्बाला : चन्द्रिका ( TSN)-किसान आंदोलन के चलते बंद शंभू बॉर्डर कांवड़ यात्रियों के लिए मुसीबत बना हुआ है। जिसके चलते कांवड़िए अपनी जान जोखिम में डालने को मजबूर हैं। कांवड़ियों को 20- 30 किलोमीटर लंबा सफर घग्घर नदी के बीच से या ऊपर से जा रही रेलवे लाइन से करना पड़ रहा है. जिससे उनकी जान का भी जोखिम बना रहता है। वहीं इस सफर के दौरान उन्हें विश्राम या भोजन की भी कोई व्यवस्था नहीं मिलती।
सावन का महीना चल रहा है और इस महीने में पंजाब, हरियाणा, हिमाचल से भारी संख्या में श्रद्धालु भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए हरिद्वार से गंगा जल लाकर अपने अपने क्षेत्र के मंदिरों में स्थापित शिवलिंग पर चढ़ाते हैं। लेकिन इस बार किसान आंदोलन के चलते बंद शंभू बॉर्डर कांवड़ियों के लिए परेशानी का कारण बना हुआ है। कांवड़ियों को जान जोखिम में डालकर घग्घर नदी या रेलवे लाइन से होते हुए पंजाब जाना पड़ रहा है। जिससे उन्हें 20-30 किलोमीटर सफर भी अधिक करना पड़ रहा है। वहीं इन दिनों पहाड़ों में हो रही बारिश के चलते घग्घर नदी का बहाव भी पूरा बना हुआ है जिससे नदी को पार करना मुश्किल हो गया है। कांवड़िए नदी के ऊपर से गुजर रही रेलवे पुल से अपनी जान जोखिम में डालकर पंजाब की और जा रहे हैं। कांवड़ियों का कहना है कि डर के साय में रेलवे लाइन के साथ साथ किसी तरह बॉर्डर पार कर पाए हैं। जो साथ में चलने वाले वाहन हैं उन्हें तो और भी लंबे रास्ते से लाना पड़ रहा है। सरकार को कांवड़ यात्रा के दौरान थोड़ा रास्ता खोलना चाहिए था।







