कुरुक्षेत्र : चन्द्रिका ( TSN)-सावन मास की शिवरात्रि पर कावड़ में गंगाजल लेकर आने वाले शिव भक्त कावड़ियों में खासा उत्साह देखने को मिला। गुरु पूर्णिमा को हरिद्वार से पैदल चलकर कावड़िए गुरुवार को अपने अपने गंतव्य स्थान पर पहुंच गए। शिवरात्रि से एक दिन पूर्व यानी वीरवार की देर रात कावड़ यात्रा के अंतिम दिन सभी शिव भक्त तेजी से आगे बढ़ते हुए अपने नजदीकी स्थान और शिव मंदिर तक पहुंच गए। रात 12 से शिव मंदिरों में कावड़ियों द्वारा गंगाजल से जलाभिषेक करने का सिलसिला शुरू हो गया।
पिपली से पिहोवा रोड पर जगह जगह विशाल सेवा शिविर लगाए गए थे जिसमे प्रतिदिन सैकड़ों शिव भक्तों के लिए ठहरने खाने पीने तथा चिकित्सा संबंधी तमाम सुविधाएं उपलब्ध करवाई गई।कुरुक्षेत्र के संहित सरोवर के पास स्थित दुख भंजन मंदिर के पुजारी राकेश शास्त्री ने बताया कि आज शिवरात्रि का पर्व है. हिंदू सनातन धर्म में सावन मास के विशेष महत्व है. भोलेनाथ के भगत रात 12:00 से ही जल अभिषेक कर रहे हैं जो भोलेनाथ के भगत कावड़ लेकर आए हैं. वह रात से ही जल अभिषेक करने लगे हुए हैं, उनके ठहरने का यहां पर इंतजाम किया गया है. सावन मास में शिवरात्रि के पर्व का एक विशेष ही महत्व है और सावन में सोमवार के व्रत रखने से भोलेनाथ जी प्रसन्न होते हैं और भगत की सभी इच्छाएं पूर्ण करते हैं.







