कैथल : ( TSN)-आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ प्रदेश उपाध्यक्ष अनुराग ढांडा ने सोमवार को चुनावी कार्यालय में प्रेसवार्ता की। उन्होंने कहा कि हम तो ये सोच कर चुनाव लड़ रहे थे हम बीजेपी के खिलाफ चुनाव लड़ रहे हैं और जनता भी ये सोच कर भागीदारी कर रही थी कि बीजेपी के खिलाफ चुनाव लड़ रहे हैं। लेकिन अब ऐसा लग रह है कि हम चुनाव आयोग के खिलाफ लड़ रहे हैं और चुनाव आयोग भी आम आदमी पार्टी के खिलाफ एक उम्मीदवार बनकर चुनाव मैदान में खड़ा हो गया है। मैं ऐसा इसलिए कह रहा हूं कि अभी तक की परंपरा के मुताबिक यदि चुनाव आयोग को उसकी किसी कमी के बारे में आगाह किया जाए तो उस प्रक्रिया में तुरंत सुधार किया जाता है। लेकिन चुनाव के इतिहास में पहली बार ऐसा हो रहा है कि जिसने चुनाव आयोग की कमी को उजागर किया उसी व्यक्ति के खिलाफ चुनाव आयोग द्वारा एफआईआर करवाई जा रही है।
जिसने चुनाव आयोग की कमी बतायी उसी के खिलाफ FIR करवा दी
अनुराग ढांडा ने कहा कि इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि जिस प्रकार पहले दिन से जब हमने रैली की अनुमति के लिए आवेदन किया तो उसमें चुनाव आयोग की तरफ गाली लिखकर डाली गई। इसी दफ्तर से कैथल में ये बार बार क्यों हो रहा है। उसके बाद भी कैथल में चुनाव आयोग का जिस तरीके का रवैया है वो स्पष्ट तौर पर समझ में आता है कि ये एक पार्टी बनकर बीजेपी के रिप्रजेंटेटिव के तौर पर यहां चुनाव आयोग के अधिकारी काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा जो मतपत्रों के जरिए वोटिंग हुई थी तो हमने कहा था कि इस बैलेट बॉक्स पर कोई सील नहीं लगी है। उसके बदले में चुनाव आयोग ने जिन्होंने उस बैलेट बॉक्स का वीडियो बनाया मास्टर सतबीर गोयत के खिलाफ एक एफआईआर दर्ज कर दी, जिसमें कहा गया कि इन्होंने सरकारी काम में बाधा डाली है। इस एफआई आर में आईपीसी की धारा 171, 186, 131 और 132 लगाई गई है। चुनाव आयोग बताए कि यदि इस बैलेट बॉक्स पर सील नहीं लगी है तो ये गलती सतबीर गोयत की है या चुनाव आयोग की। इसमें जो मतपत्र डाला जा रहा है क्या वो मतपत्र वोटर अपने हाथों से डाल रहा है या कोई अधिकारी है। हम जनता के समक्ष भी चुनाव आयोग के इस रवैये को रखेंगे और इसकी शिकायत केंद्रीय चुनाव आयोग को भी देंगे।
अनुराग ढांडा ने कहा कि हमारा पहला सवाल है कि क्या प्रक्रिया के अनुसार बैलेट बॉक्स पर सील नहीं लगना सही है? यदि ये सही है तो इसके बाद बाकी जगहों पर बैलेट बॉक्स पर सील लगाकर वोट क्यों डलवाए गए। जिन्होंने सील लगवाकर वोट डलवाए वो अधिकारी सही है या जिन्होंने बिना सील के वोट डलवाए थे वो सही हैं। क्या वोट डलने के बाद किसी अधिकारी के पास ये पावर है कि वो मतमत्र को अपने हाथों में ले सकता है। इस पूरे वीडियो में जो नजर आता है ये चुनाव आयोग का अधिकारी है जिसने ये मतपत्र मतपेटी मे डाला है, जिस पर सील नहीं लगी हुई है। चुनाव अधिकारी ने वोटर से फोल्ड किया हुआ मतपत्र लिया और उसको खुद लिफाफे में डाला।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी से किया अनुरोध
अनुराग ढांडा ने कहा कि हमारा मुख्य निर्वाचन अधिकारी अनुराग अग्रवाल से अनुरोध है कि उनको हमने पहले भी शिकायत दी थी जिसको उन्होंने गंभीरता से लिया था और इस बार भी जब शिकायत की तो उन्होंने आश्वस्त किया था कि वो इस मामले को देखेंगे और कार्रवाई करेंगे। उन्होंने कहा कि हम पूछना चाहते हैं कि क्या कैथल के चुनाव अधिकारी सीईओ हरियाणा के निर्देशों का पालन कर रहे हैं या अपनी मनमर्जी से चुनाव को चला रहे हैं। क्या कैथल के चुनाव अधिकारी सार्वजनिक तौर पर बयान दे सकते हैं कि किसी पेटी पर सील लगे या न लगे चुनाव में उनकी मनमर्जी चलेगी और यदि उनकी बात को काई सार्वजनिक करता है तो उस पर एफआईआर कराते हैं।
अनुराग ढांडा ने कहा कि कैथल के चुनाव अधिकारी ये भी बताएं कि जिस दिन पोलिंग होगी, उस दिन हमारे बुथ एजेंट को अपने मुंह पर टेप लगाकर बैठना है। यदि कोई गलत काम होता है तो उसके खिलाफ बोलना है या नहीं बोलना है। चुनाव आयोग को ये स्थिति स्पष्ट करनी होगी। ये बहुत गंभीर मामला है इसको लेकर पूरे लोकसभा क्षेत्र में आक्रोश है। यदि हमें जेल में डालकर आपको चुनाव लड़ना है तो हम उसके लिए भी तैयार हैं। हम इंतजार करेंगे कि चुनाव आयोग इस पर क्या कार्रवाई करता है। नहीं तो हम अपने अगले कदम के बारे में भी घोषणा करेंगे। यदि खुलेतौर पर इसके खिलाफ आवाज उठानी पड़ी और आंदोलन करना पड़ा तो हम पिछे नहीं हटेंगे। क्योंकि ये सरेआम देश के लोकतंत्र के खिलाफ खिलवाड़ हो रहा है।
एफआईआर को चुनाव आयोग तुरंत प्रभाव रद्द करवाए
अनुराग ढांडा ने कहा कि हमारा स्पष्ट तौर पर कहना है कि इस एफआईआर को चुनाव आयोग तुरंत प्रभाव रद्द करवाए। इसको कैसे रद करवाना है, इसको चुनाव आयोग देखे। क्योंकि आज के दिन में एडमिनीस्ट्रेशन चुनाव आयोग के अधीन आता है और उन संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करे जो अनसील्ड मतपेटी में वोट डलवा रहे थे। जिले में निर्वाचन आयोग के सीनियर अधिकारी जो इन सभी अधिकारियों को सरपरस्ती दे रहे हैं। उन सभी के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। क्योंकि ये साफ तौर पर लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के लिए बहुत जरुरी कदम है। हम सीईओ हरियाणा और केंद्रीय चुनाव आयोग को इसमें हस्तक्षेप करने की मांग करते हैं।







