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8 साल बाद गुरुग्राम अस्पताल मामले में हाईकोर्ट सख्त, दवाओं पर 1700% तक वसूली का आरोप

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गुरुग्राम   |  गुरुग्राम के एक निजी अस्पताल से जुड़े कथित मुनाफाखोरी के मामले में पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए केंद्र सरकार और हरियाणा सरकार से जवाब मांगा है। यह मामला करीब आठ साल पुरानी “प्रतिकूल रिपोर्ट” से जुड़ा है, जिसमें मरीजों से दवाओं और उपभोग्य सामग्रियों पर अत्यधिक दरों पर वसूली का आरोप लगाया गया था।

मामले की सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश शील नागू की पीठ ने संबंधित अधिकारियों से यह स्पष्ट करने को कहा कि वर्ष 2018 में प्रस्तुत रिपोर्ट के बाद अब तक इस पर क्या कार्रवाई की गई। अदालत ने दोनों पक्षों—केंद्र और राज्य सरकार—को हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है और अगली सुनवाई 11 मई को तय की है।

याचिकाकर्ता डॉ. संदीप कुमार गुप्ता ने जनहित याचिका दाखिल कर आरोप लगाया है कि निजी अस्पताल मरीजों से दवाओं और मेडिकल सामग्री पर बाजार मूल्य से कई गुना अधिक शुल्क वसूलते हैं और मरीजों को बाहरी केमिस्ट से दवा खरीदने की अनुमति नहीं देते। इसे उन्होंने अनुचित व्यापार प्रथा बताते हुए इसे असंवैधानिक करार दिया है।

याचिका में राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (NPPA) की 20 फरवरी 2018 की एक रिपोर्ट का भी हवाला दिया गया है, जिसमें यह संकेत दिया गया था कि कुछ निजी अस्पतालों ने भर्ती मरीजों के इलाज में उपयोग होने वाली दवाओं और उपभोग्य सामग्रियों पर 1700% तक मार्जिन वसूला।

याचिकाकर्ता ने अदालत से मांग की है कि इस पूरे मामले की जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी या सरकार द्वारा गठित समिति से कराई जाए, ताकि यह पता लगाया जा सके कि मरीजों से कितनी अतिरिक्त राशि वसूली गई और जिम्मेदारों के खिलाफ उचित कार्रवाई हो सके।

 

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