फरीदाबाद (एकता): आपने कई झीलों को देखा और उनके बारे में सुना भी होगा लेकिन आज हम आपको एक ऐसी झील से रु-ब-रु करवाएंगे जिसे देखकर आप हैरान रह जाएंगे। इस झील का रहस्य कुछ ऐसा है कि लोग इसे अभिशाप भी मानते और कई चमत्कार। यह झील 10वीं सदी में बनवाई गई थी। आइए जानिए इस झील का इतिहास।
फरीदाबाद से आठ किमी दूर अरावली में सूरजकुंड के नाम से मशहूर झील उगते सूरज की तरह दिखती है। बता दें कि इसे तोमर वंश के शासक सूरजपाल द्वारा बनवाया गया था। इस कुंड के बीचोंबीच भव्य सूर्य मंदिर है, जो राजा ने सूर्य देवता की उपासना के लिए तैयार कराया था। छठ पूजा के अवसर पर इस कुंड का महत्व और भी बढ़ जाता है। वैसे तो यह जगह अपने मेले के कारण आकर्षण का केंद्र रही है लेकिन यहां की झील पर्यटन स्थलों में से एक है।
डेथ वैली में से एक खूनी झील के नाम से मशहूर इस झील को भारद्वाज झील के नाम से भी जाना जाता है। खास बात यह है कि यह झील नीले पानी से भरी हुई है, जो लोगों को आकर्षित करती है। कई लोग छुट्टियों में इस झील में घूमने-फिरने के लिए आते हैं। यह जगह ट्रैवलर्स की फेवरेट रही है।

पहाड़ियों से घिरी यह झील बेहद सुंदर दिखती है। 1991 में इस झील की खुदाई हुई थी, वो खुदाई भू-जल को छू गई और बाद में ये प्राकृतिक झील बन गई। यह झील काफी गहरी है और यहां तैरने पर रोक लगाई गई है। दुर्भाग्य से, इस स्थान पर कई घटनाएं हुई हैं।








