हरियाणा : चन्द्रिका ( TSN)– किसानों और आम लोगों के बीच मशरूम की खेती की लोकप्रियता में इजाफा हुआ है। पहले इसकी खेती को पहाड़ी क्षेत्रों के लिए ही उपयुक्त माना जाता था। अब नई और आधुनिक तकनीकें आने के बाद इसकी खेती मैदानी क्षेत्रों से लेकर घरों तक में भी करने लगे है। ऐसे ही पलवल जिले के गांव कटेसरा में रहने वाले किसान ओमप्रकाश बीते 10 वर्षों से लगभग आधा एकड़ जमीन पर बटन मशरूम की खेती कर रहे हैं। उनका कहना है कि इस खेती के माध्यम से वह सभी खर्चे हटाकर 3 लाख रुपए तक का मुनाफा कमा रहे है।
किसान ओमप्रकाश ने बताया की वह करीब दस वर्ष पूर्व फरीदाबाद स्थित कृषि विज्ञानं केंद्र की ट्रेनिंग में गए थे, जहां उन्हें मशरूम की खेती करने के तरिके और उसके मुनाफे के बारे में जानकारी दी गयी थी। उसके बाद उन्होंने करीब आधा एकड़ जमीन पर टीन शेड डालकर मशरूम की खेती शुरू की जिससे उन्हें अच्छा मुनाफा मिल रहा है। उन्होंने अपनी आधा एकड़ जमीन पर टीन शेड के अंदर बांस- बल्लियों के सहारे मशरूम बोने के लिए बेड बनाए हैं, उन्हीं पर वह मशरूम उगा रहे हैं। किसान ओमप्रकाश ने बताया की वह अपने परिवार के साथ मिलकर इस खेती को करते है साथ ही वह अपनी अन्य जमीन पर सब्जियों की खेती करते है। उन्होंने बताया की वह गर्मी और सर्दी दोनों ही मौसमों में मशरूम की पैदावार ले रहे है। सर्दी तो मशरूम के लिए अपने आप ही अनुकूल मौसम है । जबकि उन्होंने गर्मीं में इस पैदावार को लेने के लिए टीन शेड के अंदर एयर कंडीशन (एसी) लगाए हुए है ताकि गर्मी के दिनों में मौसम मशरूम की फसल के अनुरूप रहे।
ओमप्रकाश ने पहले करते थे परम्परागत खेती
किसान ओमप्रकाश ने बताया की पहले वो भी परम्परागत खेती करते थे जो एक जुए की तरह थी जिसमें उन्हें एक तो हमेशा आवारा पशुओं और आपदा से खराब होने का डर रहता था । अगर पैदावार सही सलामत हो भी जाती थी तो मेहनत और लागत के हिसाब से उन्हें उचित मूल्य नहीं मिलता था, जिससे मुनाफा नाममात्र था, लेकिन अब मशरूम की खेती में न तो आपदा और आवारा पशुओं से नुकसान का डर है और न ही परम्परागत खेती की तरह मेहनत और लागत। उन्होंने कहा की वो मशरूम को तैयार होने के बाद 200 ग्राम के पॉलीथिनों में पांच कर अपनी लोकल मंडियों में बेचते हैं जिससे उन्हें ताजा फसल होने के कारण अच्छा रेट मिलता है।
उन्होंने बताया की उन्हें इस खेती से सालाना सभी खर्चे हटाकर 2 से तीन लाख रुपये तक की आमदनी होती है। उन्होंने कहा की अगर किसी को जानकारी अच्छी और और समय पर सब काम किसान करता रहे तो कृषि के माध्यम से मशरूम सबसे अच्छा आमदनी का स्रोत्र है। उन्होंने अन्य किसानों को प्रेरित करते हुए कहा की अन्य किसान भी मशरूम की खेती की और रुख करें ताकि उनकी आर्थिक दशा अच्छी हो सके लेकिन इसके लिए वो प्रॉपर जानकारी हासिल करने के बाद शुरुआत में कम तादाद में ही मशरूम उगाये ताकि किसी जानकारी के आभाव में अगर कोई नुकसान भी हो तो उसे किसान सहन कर सके।







