पानीपत (एकता): हर साल 26 जुलाई को पूरे देश में ‘कारगिल विजय दिवस’ मनाया जाता है। इस कारगिल यु+द्ध में कई वीर सपूत दुश्मनों के छक्के छुड़ाते हुए शही+द हो गए। मीडिया सूत्रों के अनुसार भारत और पाक के बीच 1999 के मई और जुलाई महीने के बीच कश्मीर के कारगिल में सशस्त्र संघर्ष का नाम है। यु#द्ध में कई वीर सपूत दुश्मनों के दांत खट्टे करते हुए श+हीद हो गए थे। इस यु#द्ध में हमने कई वीर सपूतों को खोया। अपने अदम्य साहस और वीरता से कारगिल में तिरंगे की आन-बान-शान बरकरार रखने वाले वीर सैनिकों को कोटि-कोटि नमन।
बता दें कि इस यु$द्ध में प्रदेश के पानीपत के सनौली क्षेत्र के 3 वीर सपूतों ऋषिपाल त्यागी, रियासत अली व सुशील कुमार दुश्मनों से लोहा लेते हुए श%हीद हुए थे। सूत्रों के मुताबिक इन तीनों सपूतों की शहा@दत से आज हर कोई गर्व महसूस करता है। हैरानी की बात यह है कि हरियाणा के इन वीरों ने पहले ही अपने परिवारों से कह दिया था कि अगर उन्हें यु@द्ध में कुछ हो जाए तो दुखी न होना। क्योंकि किस्मत वालों को ही श&हीद होने का मौका मिलता है। बता दें कि इन वीर सपूतों की बहादुरी की दास्तां पूरे क्षेत्र में सुनाई जाती है।
जानकारी के मुताबिक सनौली खुर्द के ऋषिपाल त्यागी 28 मई 1999 को कारगिल जंग में श+हीद हुए थे। उन्होंने कहा कि वह एक हफ्ते की छुट्टी लेकर घर आएंगे, लेकिन उसी समय यु@द्ध शुरू हो गया। उनके घर आने का सपना सिर्फ सपना बनकर ही रह गया। दरअसल यु%द्ध के दौरान दुश्मनों से लड़ते हुए उन्हें गोलि#यां लग गई जिससे वह श+हीद हो गए। लेकिन उन्होंने जाते-जाते भी अपने देश के लिए काफी कुछ किया। 28 मई को उन्हें गो#ली लगी और वह श+हीद हो गए। खास बात यह है कि शहीद की पत्नी को उनकी श#हादत पर गर्व है। लेकिन सरकार शही+दों के स्मारकों की देखभाल की तरफ कोई ध्यान नहीं दे रही।

रियासत अली देश के लिए हुए श#हीद लेकिन सरकार नहीं दे रही कोई ध्यान
बता दें कि अधमी गांव के शही@द रियासत अली देश के लिए दुश्मनों से लोहा लेते हुए श+हीद हो गए। उनकी श$हादत पर परिवार को तो नाज है, लेकिन सरकार की ओर से श%हीद के परिवार को पेट्रोल पंप तो मिला, लेकिन रियासत के नाम पर न तो सड़क का नाम रखा गया, न ही स्कूल का।
श+हीद सुशील कुमार की सरकार ने की उपेक्षा
बताया जाता है कि अतोलापुर गांव निवासी कारगिल श%हीद सुशील कुमार की सरकार ने उपेक्षा की है। उनके परिवार का कहना है कि सरकार ने श@हीद होने पर अनेक घोषणाएं की थीं। सुशील की पत्नी ने सरकार से धनराशि व पेट्रोल पंप लेने के बाद दूसरी शादी कर ली। उनकी मां की बेटे सुशील के गम में मौ+त हो गई। सुशील की मूर्ति भी उनके परिवार ने ही अपने पैसों से ही बनवाई। सरकार अब शही&दों की स्मारत की तरफ कोई भी ध्यान नहीं दे रही है।








