कुरुक्षेत्र (अंकुर कपूर): कुरुक्षेत्र इतिहास के पन्नों में आज भी कुछ ऐसे किस्से और कहानियां मौजूद हैं जिनसे लोग अनजान हैं। हम बात कर रहे हैं हरियाणा के कुरुक्षेत्र जिले के थानेसर शहर में बने शेखचिल्ली के मकबरे की। जिसे हरियाणा का ताजमहल भी कहा जाता है। इस मकबरे में लगा पत्थर भी वही पत्थर है जो आगरा में स्थित ताजमहल में लगा है। इसकी बनावट भी मिलती जुलती है। यही कारण है कि देश के प्रमुख राष्ट्रीय स्मारकों में शुमार इस मकबरे को हरियाणा का ताजमहल कहा जाता है।
राजधानी दिल्ली से अमृतसर के बीच इसके अलावा कोई भी ऐसा स्मारक नहीं है, जिसमें शाहजहां के समकालीन संगमरमर का प्रयोग किया गया हो। प्रसिद्ध सूफी संत शेखचेहली की याद में दाराशिकोह ने लगभग 17वीं के मध्य में इसे बनवाया था। यह मकबरा दाराशिकोह के पठन-पाठन और आध्यात्मिक ज्ञान का भौतिक प्रतीक था। मकबरे की स्थापत्य कला बेजोड़ है, जो हर्ष के टीले के नाम से विख्यात प्राचीन टीले के पूर्वी किनारे पर स्थित है।
इतिहासकारों का मानना है कि इसका निर्माण शाहजहां के सबसे बड़े पुत्र दारा शिकोह ने करवाया था। जो इस बात का प्रतीक है, मध्यकाल में थानेसर सूफी उपासको का घड़ रहा है। कुछ लोगों का यह भी मानना है कि ताजमहल से बचे संगमरमर का इस्तेमाल इस मकबरे को बनाने में किया गया है। भारत सरकार द्वारा अब इस मकबरे को 100 स्मारकों में शामिल किया गया है, जब भारत G-20 की अध्यक्षता करेगा। तब इस स्मारक पर भी सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा।
इस टीले के पश्चिमी भाग में जलालुद्दीन साबरी की दरगाह भी मौजूद है, जहां उन्हें उनके मरणोपरांत दफनाया गया था। आज यह टीला पर्यटकों के लिए एक ऐतिहासिक इमारत है जिसकी बनावट व सुंदरता देखने के लिए लोग दूर-दूर से कुरुक्षेत्र पहुंचते हैं।








