कैथल | कैथल के कलायत क्षेत्र में एक बेहद दर्दनाक घटना सामने आई, जहां प्राचीन कपिल मुनि सरोवर में डूबने से दो सगी बहनों की मौत हो गई। जिस घर में बड़ी बेटी के जन्मदिन की खुशियां मनाने की तैयारी चल रही थी, वहां कुछ ही घंटों में मातम छा गया। इस घटना ने पूरे इलाके को गहरे सदमे में डाल दिया है।
मृतक बहनों की पहचान 20 वर्षीय पलक और 18 वर्षीय परमजीत के रूप में हुई है। पलक परिवार की बड़ी बेटी थी और घर की आर्थिक मदद के लिए एक गैस एजेंसी में नौकरी करती थी। संयोग से उसका जन्मदिन था। परिवार जन्मदिन मनाने की तैयारी कर रहा था, लेकिन सुबह दोनों बेटियों की मौत की खबर ने सबकुछ बदल दिया।
बताया जा रहा है कि दोनों बहनें प्राचीन कपिल मुनि सरोवर के पास पहुंचीं और पानी में डूब गईं। घटना को लेकर कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। आशंका जताई जा रही है कि एक बहन को डूबता देख दूसरी उसे बचाने के लिए पानी में कूद गई होगी। हालांकि, फिलहाल ऐसा कोई स्पष्ट तथ्य सामने नहीं आया है जिससे यह साबित हो सके कि दोनों ने एक साथ आत्मघाती कदम उठाया।
मंदिर परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों में दोनों बहनें तेज गति से सरोवर की ओर जाती दिखाई दी हैं। इससे माना जा रहा है कि घटनाक्रम अचानक और जल्दबाजी में हुआ।
घटना के बाद पूरे क्षेत्र में शोक का माहौल है। पड़ोसियों और परिचितों के अनुसार परिवार के सदस्यों के बीच आपसी संबंध काफी अच्छे थे। आर्थिक रूप से कमजोर होने के बावजूद पिता रविंद्र कुमार अपने परिवार के प्रति बेहद जिम्मेदार थे। दो जवान बेटियों की असमय मौत ने माता-पिता और परिजनों को गहरे सदमे में डाल दिया है।
इस हादसे के बाद कपिल मुनि सरोवर की सुरक्षा व्यवस्थाओं पर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि सरोवर पर किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए पर्याप्त इंतजाम नहीं थे। मौके पर न तो लाइफ जैकेट उपलब्ध थीं और न ही प्रशिक्षित सुरक्षा कर्मी तैनात थे।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, प्राचीन कपिल तीर्थ कमेटी के प्रधान राजू कौशिक और युवक राजबीर रहबारी ने अपनी जान जोखिम में डालकर दोनों बहनों को बचाने के लिए गहरे पानी में छलांग लगाई, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी। घटना के बाद कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड की व्यवस्थाओं को लेकर लोगों में नाराजगी देखने को मिल रही है।
राज्य बाल संरक्षण आयोग की पूर्व सदस्य सुमन राणा ने घटना पर दुख जताते हुए कहा कि बच्चों और युवाओं को मानसिक तनाव से बाहर निकालना समाज और परिवार की साझा जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि समय-समय पर काउंसलिंग और भावनात्मक सहयोग बेहद जरूरी है, ताकि युवा कठिन परिस्थितियों का सामना मजबूती से कर सकें।







