गुरुग्राम । हरियाणा सरकार ने गुरुग्राम मेट्रो परियोजना को समयबद्ध तरीके से पूरा करने के लिए नई भूमि खरीद नीति लागू की है। इस नीति के तहत अब गुरुग्राम मेट्रो रेल लिमिटेड (GMRL) को प्रस्तावित मेट्रो कॉरिडोर के लिए आवश्यक निजी जमीन मालिकों से सीधे बातचीत कर खरीदने का अधिकार दिया गया है।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई जमीन मालिक तय प्रक्रिया में सहयोग नहीं करता या जमीन बेचने से इनकार करता है, तो संबंधित भू-भाग को केंद्रीय भूमि अधिग्रहण कानून के अंतर्गत अनिवार्य रूप से अधिग्रहित किया जा सकता है। टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग ने इस संबंध में 8 जनवरी को आधिकारिक अधिसूचना जारी की है।
यह नीति 29.05 किलोमीटर लंबे मेट्रो कॉरिडोर पर लागू होगी, जो मिलेनियम सिटी सेंटर से साइबर सिटी तक प्रस्तावित है। यह कॉरिडोर गुरुग्राम के व्यापक मोबिलिटी प्लान का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसके तहत वर्ष 2041 तक लगभग 200 किलोमीटर के मेट्रो और मास ट्रांजिट नेटवर्क के विकास का लक्ष्य रखा गया है।
अधिकारियों के अनुसार मेट्रो लाइन का अधिकांश हिस्सा सरकारी जमीन से होकर गुजरेगा, लेकिन कुछ स्थानों पर निजी भूमि का उपयोग अनिवार्य है। इनमें वायडक्ट सेक्शन, मौजूदा संरचनाओं के पास निर्माण कार्य और मेट्रो डिपो से जुड़ा सीमित निजी भू-भाग शामिल है। यदि इन जमीनों का अधिग्रहण समय पर नहीं हुआ, तो पूरे प्रोजेक्ट की समय-सीमा प्रभावित हो सकती है।
सरकार ने लंबी अधिग्रहण प्रक्रिया से बचने के लिए ‘म्यूचुअल नेगोशिएशन के जरिये डायरेक्ट परचेज’ मॉडल अपनाया है। इसके तहत जमीन मालिकों को 2013 के भूमि अधिग्रहण कानून के तहत निर्धारित मुआवजे से 25 प्रतिशत अधिक राशि दी जाएगी। इस राशि में पुनर्वास और पुनर्स्थापन से जुड़े लाभ भी शामिल होंगे।
नीति के अनुसार जमीन का भुगतान सीधे जमीन मालिक के बैंक खाते में इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से किया जाएगा। रजिस्ट्रेशन पर किसी प्रकार की स्टांप ड्यूटी नहीं लगेगी और जमीन खरीद से जुड़ी पूरी लागत GMRL द्वारा वहन की जाएगी।







