Chandigarh,18 December-:हरियाणा विधानसभा के शीतकालीन सत्र के पहले दिन सदन में नवम पातशाह श्री गुरु तेग बहादुर जी के 350वें शहीदी वर्ष के अवसर पर प्रदेशभर में आयोजित कार्यक्रमों की सफलता को लेकर सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया गया। सदन ने हरियाणा सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी, शहीदी दिवस आयोजन समिति, जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों और प्रदेशवासियों के सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया। साथ ही, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा कुरुक्षेत्र में गुरु जी को नमन करने और अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव में सहभागिता के लिए धन्यवाद प्रस्ताव भी पारित किया गया।
हरियाणा विधानसभा के शीतकालीन सत्र के पहले दिन संसदीय कार्य मंत्री महीपाल ढांडा द्वारा श्री गुरु तेग बहादुर जी के 350वें शहीदी वर्ष पर आयोजित कार्यक्रमों को लेकर सरकारी प्रस्ताव पेश किया गया। चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने सदन को संबोधित करते हुए कहा कि गुरु तेग बहादुर जी का जीवन सत्य, धर्म और मानवता की रक्षा का अमर प्रतीक है।उन्होंने कहा कि गुरु जी ने अन्याय के सामने झुकने के बजाय बलिदान को चुना और भारतीय सभ्यता को अमर संदेश दिया।मुख्यमंत्री ने कहा कि 25 अगस्त 2025 को विधानसभा में सर्वसम्मति से यह संकल्प लिया गया था कि गुरु जी के 350वें शहीदी वर्ष को पूरे प्रदेश में गरिमा और श्रद्धा के साथ मनाया जाएगा। इसी संकल्प के तहत 3 नवंबर को चंडीगढ़ में सर्वदलीय बैठक आयोजित की गई, जिसमें सभी राजनीतिक दलों ने कार्यक्रमों को भव्य बनाने के सुझाव दिए।
मुख्यमंत्री ने बताया कि सर्वदलीय सहमति से यह निर्णय लिया गया कि हरियाणा सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी आयोजन करेगी और राज्य सरकार पूर्ण सहयोग देगी। चार पावन यात्राओं का आयोजन किया गया,जिनका विभिन्न जिलों और गांवों में सभी दलों के नेताओं व आम नागरिकों ने स्वागत किया। इन यात्राओं के माध्यम से गुरु जी का संदेश जन-जन तक पहुंचाया गया।उन्होंने कहा कि सिरसा, पिंजौर, फरीदाबाद और सढौरा से निकली यात्राएं 20 जिलों के 500 से अधिक गांवों से होकर गुजरीं और 24 नवंबर को कुरुक्षेत्र पहुंचीं। 25 नवंबर को ज्योतिसर में आयोजित विशाल समागम में लाखों श्रद्धालुओं ने भाग लिया।
मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस अवसर पर गुरु तेग बहादुर जी को समर्पित स्मारक सिक्का,डाक टिकट और कॉफी टेबल बुक का विमोचन किया,जिससे इस आयोजन को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान मिली।उन्होंने कहा कि प्रदेशभर में 350 रक्तदान शिविर लगाए गए,स्कूलों में निबंध और कहानी प्रतियोगिताएं आयोजित हुईं,जिनमें लाखों विद्यार्थियों ने भाग लिया।गुरु जी की स्मृति में सरकारी पॉलिटेक्निक अंबाला का नामकरण,सड़कों के नामकरण, मैराथन,राष्ट्रीय सेमिनार,वन विकास और कृषि महाविद्यालय की घोषणा जैसे अनेक निर्णय लिए गए।







