चंडीगढ़ | हरियाणा में सामने आए MBBS परीक्षा घोटाले की जांच एक बार फिर तेज होने जा रही है। इस मामले में संलिप्त 14 छात्रों से पुलिस दोबारा पूछताछ करेगी। आरोप है कि इन छात्रों ने पहले दौर की जांच में न केवल सहयोग करने से इनकार किया, बल्कि जानबूझकर तथ्यों को छिपाकर जांच को गुमराह भी किया। अधिकारियों ने पुष्टि की है कि छात्रों के जवाबों में विसंगतियां पाई गई हैं।
जांच कर रहे एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, इस घोटाले की शुरुआत एक शिकायत से हुई थी जो एक MBBS छात्र ने विश्वविद्यालय प्रशासन को दी थी। शिकायत में एक वीडियो भी शामिल था, जिसमें कुछ लोग एक निजी कमरे में बैठकर उत्तर पुस्तिकाएं भरते हुए दिखाई दे रहे थे। जांच में यह भी सामने आया कि वर्ष 2020, 2021 और 2022 बैच के कई छात्रों की उत्तर पुस्तिकाएं जानबूझकर बदली गई थीं।
विश्वविद्यालय द्वारा गठित फैक्ट फाइंडिंग कमेटी ने आंसर शीट में हेरफेर के कई मामले पकड़े थे। रिपोर्ट के अनुसार, कुछ उत्तर पुस्तिकाएं विश्वविद्यालय के ही एक कर्मचारी के घर पर दोबारा लिखी गईं और फिर से जमा करवाई गईं, जिससे छात्रों को पासिंग मार्क्स मिल सके।
अब तक 4 छात्रों ने अपने बयान दर्ज करवाए हैं, जबकि बाकी 6 छात्रों से पूछताछ अभी होनी बाकी है। पुलिस ने बताया कि अप्रैल में पूछताछ के दौरान कुल 14 छात्रों ने सहयोग नहीं किया। साक्ष्य मजबूत करने के लिए 200 से अधिक उत्तर पुस्तिकाएं रोहतक की सुनारिया स्थित फोरेंसिक लैब भेजी गई हैं।
इसके अलावा, विश्वविद्यालय ने पुस्तिकाओं की प्रमाणिकता जांचने के लिए हैंडराइटिंग एक्सपर्ट्स को भी लगाया है। हाल ही में 30 छात्रों के हैंडराइटिंग सैंपल लिए गए हैं और इनकी रिपोर्ट दो सप्ताह के भीतर आने की उम्मीद है। रिपोर्ट के आधार पर पुलिस आगे की कार्रवाई करेगी।







