चंडीगढ़ । हरियाणा के ऊर्जा, परिवहन और श्रम मंत्री अनिल विज ने भारत-पाकिस्तान सीजफायर और उससे जुड़े राजनीतिक घटनाक्रमों पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। विज ने विपक्ष की ओर से विशेष सत्र बुलाने की मांग पर तीखा जवाब देते हुए कहा कि “जो बातें गोपनीय हैं, उन्हें सार्वजनिक नहीं किया जा सकता। युद्ध और सुरक्षा जैसे मामलों में पारदर्शिता की अपनी सीमाएं होती हैं।”
इंदिरा गांधी के कार्यकाल की आलोचना
विज ने कांग्रेस और पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि “देश को सबसे बड़ा नुकसान इंदिरा गांधी के समय में हुआ। शिमला समझौते के जरिए उस समय जो जमीन और रणनीतिक बढ़त हमारी सेना ने अर्जित की थी, वह वार्ता की मेज पर गंवा दी गई।” उन्होंने कहा कि “हमें उस समय पाकिस्तान से पीओके की मांग करनी चाहिए थी, तब युद्ध पूरी तरह से समाप्त हो सकता था।”
सीजफायर को स्थायी समाधान नहीं मानते विज
भारत और पाकिस्तान के बीच हुए सीजफायर को लेकर विज ने कहा कि “यह सिर्फ युद्धविराम है, लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है। सेनाएं अब भी सीमा पर तैनात हैं और यह सिर्फ एक स्टेटस क्वो है।” उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी का हवाला देते हुए कहा, “अगर पाकिस्तान गोली चलाएगा, तो भारत गोला चलाएगा।”
विशेष सत्र और गुप्त सूचनाएं
विपक्ष द्वारा संसद का विशेष सत्र बुलाने की मांग पर विज ने कहा कि “सत्र बुलाना विपक्ष का अधिकार है, लेकिन क्या युद्ध से जुड़ी संवेदनशील जानकारी सार्वजनिक की जा सकती है? ऐसी रणनीतिक बातें केवल सीमित लोगों के बीच ही रहनी चाहिए।
पानी विवाद पर पंजाब को जवाब
हरियाणा और पंजाब के बीच पानी विवाद को लेकर विज ने पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि “जब मामला अदालत में है, तब वहां ही बात की जाएगी। अगर कोई चोरी का आरोप लगाता है, तो उसके पीछे तथ्य भी होने चाहिए।”
‘युद्ध की रणनीति को समझें’ – कांग्रेस को सलाह
विज ने कांग्रेस नेताओं को युद्ध की रणनीति को लेकर ‘अनभिज्ञ’ बताया और कहा कि “सेना में कई बार साथ खड़े जवान को भी नहीं पता होता कि अगला कदम क्या होगा। यही युद्ध की गोपनीयता होती है।







