टोहाना | हरियाणा और पंजाब के बीच जल विवाद एक बार फिर चर्चा में है। इस मुद्दे पर राज्यसभा सांसद सुभाष बराला ने टोहाना में मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि जल विवाद की शुरुआत पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान की ओर से की गई है, जो दुर्भाग्यपूर्ण है।
बराला ने कहा कि इस समय जब भारत और पाकिस्तान के बीच पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद तनावपूर्ण माहौल है, ऐसे में पानी जैसे संवेदनशील विषय पर विवाद खड़ा करना दुर्भाग्यपूर्ण और असंवेदनशील है। उन्होंने कहा, “हरियाणा अपने हिस्से का पानी मांग रहा है, कोई अतिरिक्त मांग नहीं कर रहा। प्रदेश की करीब 2.75 करोड़ जनता को पीने योग्य पानी मिलना उसका हक है।”
“ओछी राजनीति से बाज आए पंजाब सरकार” – बराला
बराला ने पंजाब सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि पानी जैसे बुनियादी विषय पर राजनीति करना समाजहित के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि जब देश आतंकवाद से लड़ रहा है और पूरा विश्व भारत-पाक संबंधों पर नज़र रखे हुए है, उस वक्त आंतरिक मामलों को लेकर राज्य सरकारों को जिम्मेदारी से व्यवहार करना चाहिए।
उन्होंने कहा, “जहां लोग पीने के पानी के लिए सेवा भावना से कार्य कर रहे हैं, वहीं पंजाब सरकार इस मुद्दे पर राजनीति कर रही है, जो बिल्कुल उचित नहीं है।”







