चंडीगढ़। पंचकूला जिले के खेड़ावाली, बाध, लेही और थाने की सेर सहित कई गांवों में अवैध खनन, स्टोन क्रशर और ईंट भट्टों से फैल रहे प्रदूषण और मानवाधिकार उल्लंघन पर हरियाणा मानव अधिकार आयोग (HHRC) ने सख्त रुख अपना लिया है। आयोग ने एक मीडिया रिपोर्ट का स्वतः संज्ञान लेते हुए केस नंबर 684/14/2025 के तहत कार्रवाई शुरू कर दी है।
जांच के दौरान सामने आया कि अवैध खनन और बिना अनुमति संचालित औद्योगिक इकाइयों से वायु, जल और मृदा प्रदूषण गंभीर स्तर तक बढ़ गया है, जिससे स्थानीय नागरिकों के जीवन, स्वास्थ्य और आजीविका के अधिकारों का उल्लंघन हो रहा है। विशेष रूप से बच्चों, बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं में श्वसन और नेत्र संबंधी बीमारियों के मामले तेजी से बढ़े हैं। साथ ही, ओवरलोड डंपरों के कारण सड़कों को भी नुकसान पहुंच रहा है, जिससे आम लोगों की सुरक्षा पर भी संकट गहरा गया है।
गंभीर कानूनी उल्लंघनों की सूची में शामिल:
- खनिज एवं खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1957
- हरियाणा लघु खनिज पट्टा एवं अवैध खनन रोकथाम नियम, 2012
- पर्यावरण संरक्षण, वायु और जल प्रदूषण निवारण अधिनियम
- भारतीय वन अधिनियम, 1927 और वन (संरक्षण) अधिनियम, 1980
- स्टोन क्रशर की स्थापना के लिए निर्धारित 2016 की अधिसूचना का उल्लंघन
संविधान के अनुच्छेद 21 का उल्लंघन करार
आयोग के चेयरपर्सन जस्टिस ललित बत्रा और सदस्यों कुलदीप जैन तथा दीप भाटिया ने संयुक्त बयान में कहा कि यह मामला संविधान के अनुच्छेद 21 — यानी जीवन, स्वास्थ्य और गरिमा के साथ जीने के अधिकार — का सीधा उल्लंघन है। आयोग ने अधिकारियों की निष्क्रियता को गंभीर प्रशासनिक लापरवाही माना है।
28 मई को होगी अगली सुनवाई, अधिकारियों को पेश होने का आदेश
आयोग ने अतिरिक्त मुख्य सचिव (पर्यावरण एवं वन्यजीव), निदेशक जनरल (खनन एवं भूविज्ञान), हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अध्यक्ष, प्रधान मुख्य वन संरक्षक, पंचकूला के उपायुक्त और पुलिस आयुक्त सहित सभी संबंधित अधिकारियों से अनुपालन रिपोर्ट तलब की है। सभी अधिकारियों को 28 मई 2025 को आयोग के समक्ष व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर रिपोर्ट पेश करने के आदेश दिए गए हैं।







