Karnal, 17 April-करनाल जिले में अप्रैल माह में विद्यालयों में प्रवेश को लेकर महामारी जारी है।जिला शिक्षा विभाग के अधिकारियों की लापरवाही सरकारी आदेशों पर भारी पड़ती हुई दिखाई दे रही है। निदेशालय द्वारा बंद किए गए गैर मान्यता प्राप्त स्कूलों में विद्यार्थियों के भविष्य से खिलवाड़ करते हुए प्रवेश लगाताक़र जारी है। मौलिक शिक्षा अधिकारी के गैर जिम्मेदाराना व्यवहार से अभी तक कोई भी कार्यवाही नही हुई है जिस कारण से जानकारी के अभाव में अभिभावकों की जेब खाली हो रही है।वहीं निजी प्रकाशकों की पुस्तकों की धड़ल्ले से हो रही बिक्री की कोई भी जिम्मेदारी लेने को तैयार नही है।
हरियाणा के करनाल जिले में कुछ गैर-मान्यता प्राप्त स्कूल चल रहे हैं और वहां दाखिले भी हो रहे हैं। अधिकारी इस मामले में चुप्पी साधे हुए हैं, जिससे चिंता बढ़ रही है। शिक्षा विभाग से मान्यता प्राप्त करने के लिए, कुछ आवश्यक दस्तावेजों को प्रस्तुत करना होता है, जिनमें से कई माध्यमिक लाइसेंस भी शामिल हैं, उदाहरण के लिए, प्रबंधन की स्वीकृत योजना, पूर्णता प्रमाण पत्र, स्वीकृत भवन योजना, जल परीक्षण रिपोर्ट, और स्वास्थ्य प्रमाण पत्र।
गैर-मान्यता प्राप्त स्कूल:
वे स्कूल जो सरकारी नियमों और मानकों का पालन नहीं करते हैं, जैसे कि बुनियादी ढांचा, शिक्षक और वेतनमान की आवश्यकताएं, आदि।माता-पिता बच्चों को इन स्कूलों में दाखिला दिलाते हैं, जिससे बच्चों के भविष्य पर बुरा प्रभाव पड़ सकता है।इन स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता, शिक्षक की योग्यता, और बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ रही है।
अधिकारी झाड़ रहे है पल्ला:
जिला मौलिक शिक्षाअधिकारी इस मुद्दे पर ध्यान देने से बच रहे हैं या कोई कार्रवाई नहीं करते हैं, जिससे गैर-मान्यता प्राप्त स्कूलों में दाखिला जारी रहता है।यह आवश्यक है कि अधिकारी गैर-मान्यता प्राप्त स्कूलों में दाखिले पर ध्यान दें और आवश्यक कार्रवाई करें ताकि बच्चों के भविष्य को सुरक्षित बनाया जा सके।
ऐसे में हो क्या रहा है:
करनाल जिले के शिक्षा विभाग के अधिकारी गैर मान्यता प्राप्त स्कूलों पर कार्यवाही को आगे नहीं आ रहे हैं अधिकारी खाना पूर्ति की कमेटी बनाकर जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ बैठे हैं जबकि अन्य जिलों में ऐसे स्कूलों पर सीलिंग की कार्रवाई जारी है सबसे गंभीर भारत यह है कि नए सत्र के 15 दिन बीत जाने पर एक भी शिक्षा अधिकारी ने अपने दफ्तर से बाहर कदम नहीं रखा है और ना ही किसी निजी स्कूलों और बुक डिपो को का निरीक्षण किया है जिले के 90 निजी गैर मान्यता प्राप्त स्कूलों में बच्चों के दाखिले धर्मल से हो रहे हैं शिक्षा अधिकारी अपनी सीट पर बर्फ की तरह जमे बैठे हैं और उक्त स्कूलों को बच्चों का दाखिला कराने की मौन स्वीकृति दी जा रही है इससे बच्चों का विषय खराब होना भी लाजमी है क्योंकि जब मुख्यालय से दबाव आएगा कब कार्यवाही को अधिकारी आएंगे तब उक्त स्कूलों में दाखिल बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होगी बता दे के जिले में 107 गैर मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों की सूची मुख्यालय से जारी की गई थी इसमें शीश तारा ने मान्यता होने संबंधी दस्तावेज जमा कर दिए हैं बाकी 90 स्कूलों में मान्यता न होने के बाद भी दाखिले हो रहे हैं।
निजी पब्लिशर की किताबें की बिक्री का खेल जोरों पर:
निजी स्कूलों की मनमानी पर रोक न लगाने और उन उन्हें छूट देने से अधिकारियों की कार्य प्रणाली पर प्रश्न चिन्ह लगना लाजमी है। अधिकारी कर्मचारियों का इतना बड़ा अमला होने के बाद भी निजी पब्लिशर की किताबें और वर्दी सरे आम बिक रही है। एक बार भी मौलिक शिक्षा अधिकारी फील्ड में नहीं उतरे हैं। केवल आश्वासन देकर जिम्मेदारी को छुपा रहे हैं। अभिभावक लूटते रहे और अधिकारी आंखों पर पट्टी बांधकर बैठे हुए हैं। वहीं हालही में अभिभावकों ने शिक्षा विभाग के अधिकारियों पर निजी स्कूल से कमीशन लेने के भी आरोप लगाए थे।
अधिकारियों द्वारा क्योँ दिया जा रहा है समय पर समय:
जब इसके बारे में करनाल जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी रोहताश वर्मा से बात की गई तो उन्होंने बताया कि 17 स्कूलों में मान्यता को लेकर संबंधित दस्तावेज जमा कर दिए हैं। बाकी को और दो दिन का समय दिया गया है। अगर दस्तावेज जमा नहीं कराए गए तो निश्चित रूप से कार्रवाई की जाएगी।







