करनाल, 3 अप्रैल-दवाओं की वजह से भी पर्यावरण को नुकसान पहुंच रहा है। जानकारों का कहना है कि हर साल 10 से 15 पर्सेंट दवाएं एक्सपायर हो जाती हैं और इन बेकार दवाओं को यूं ही सड़क किनारे या गंदगी के ढेर में फेंक दिया जाता है। प्रॉपर तरीके से इन दवाओं का डिस्पोजल नहीं किए जाने की वजह से इन केमिकल्स का साइड इफेक्ट पर्यावरण को झेलना पड़ता है।
बड़ी लापरवाही से मण्डी प्रशासन अनजान:
इस मामले में मंडी प्रशासन से सुपरवाइजर सतवीर सिंह से बात की गई ।पहले तो उन्होंने मंडी परिसर में सफाई व्यवस्था को दुरुस्त बताया। जब पूरे मामले को उनके संज्ञान में लाया गया,तब उन्होंने इस मामले से वो अनजान है बताकर आगामी सख्त कार्यवाही करने की बात कही। उन्होंने कहा कि इसके लिए जिला ड्रग विभाग की भी मदद ली जाएगी और जांच की जाएगी।
खुले में बायो मेडिकल डालना गैर कानूनी:
राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के रीजनल मैनेजर शैलेन्द्र अरोड़ा ने बताया कि पर्यावरण संरक्षण अधिनियम के तहत खुले में बायो मेडिकल वेस्ट डालना गैरकानूनी है। मामला अभी संज्ञान में आया है। किस कंपनी की दवाइयां खुले में फेंकी गई है। इन तमाम कंपनियों को नोटिस दिया जाएगा और सख्त कार्यवाही की जाएगी।
दवाओं का डिस्पोजल कैसे हो,यह एक गंभीर विषय:
बायो मेडिकल वेस्ट का भी सही तरीके से डिस्पोजल कैसे हो सके। यह एक गंभीर विषय है। बताया जा रहा कि अभी हर साल दवाईयोंबक करोड़ो का कारोबार होता है, जिसमें से 10 से 15 प्रतिशत दवा हर साल एक्सपायर हो जाती है। कंपनी में या डिपो में ऐसी दवाओं को नष्ट करने के संसाधन नहीं हैं। तो ऐसी दवाइयों को ऐसे ही नदी-नालों या गन्दगी के ढेर में फेंक देते हैं और आम लोग अपनी दवा डस्टबिन में फेंक देते हैं। इन दवाओं में केमिकल्स होते हैं जो मिट्टी, पानी और हवा तीनों को जहरीला बनाते हैं। ऐसे में यह कहा जा सकता है कि पर्यावरण को एक्सपायर्ड दवाओं के कारण भी नुकसान पहुंच रहा है।







