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कड़ाके की ठंड से दुधारू पशुओं सहित पालतू जानवर बीमारियों का हो रहे शिकार.. ऐसे रखें ध्यान

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करनाल, 14 जनवरी ( TSN)- उत्तर भारत में इस समय कड़ाके की ठंड पड़ रही है। कोहरा और पाले के साथ शीत लहर चल रही है। सर्दी से इंसानों के साथ जानवर भी परेशान होते हैं। यह मौसम किसान और पशुपालकों के लिए सावधानी बरतने वाला होता है क्योंकि बहुत से पशुपालकों की आजीविका का साधन पशुओं पर निर्भर है।
ज्यादा ठंड होने पर गाय-भैंस सहित पालतू जानवर बीमारियों के शिकार हो जाते हैं। पशु चिकित्सकों के अनुसार ठंड में जैसे तापमान गिरता है, वैसे ही पालतू पशुओं के शरीर का तापमान भी कम होने लगता है। ठंड में छोटे-बड़े सभी दुधारू पशुओं को बुखार, दस्त, निमोनिया के साथ कई अन्य बीमारी हो जाती हैं। ठंड में सबसे ज्यादा नवजात और छोटे पशुओं की दस्त और निमोनिया से होती है। इन सब बीमारियों के कारण दूध की मात्रा में कमी आनी शुरू हो जाती है और जिससे पशुपालक की आजीविका पर असर पड़ता है। इस दौरान पशुपालकों को अपने पशुओं की विशेष देखभाल करने की जरूरत होती है।
इस तरह करे रहने की व्यवस्था:
 ठंड से बचाने के लिए किसान पशुशाला या बाड़े के खुले दरवाजों और खिड़कियों को टाट, जूट या किसी अन्य कपड़े से ढक दें। जिससे ठंडी हवा बाड़े के अंदर न जा सके। पशुओं को भी जूट का बोरा या मोटे कपड़े से बना बिछौना पहनाएं। जिससे पशुओं के शरीर में गर्माहट बनी रहे। पशुओं के रहने की जगह पर नमी नहीं होने दे। इसके लिए बाड़े (पशुशाला) के बाहर अलाव जला सकते है और गर्म हीटर का भी प्रयोग कर सकते है। लेकिन, पशुओं को इनसे दूर रखे। छोटे पशुओं को जरूर धूप में बाहर निकाले, जिससे वह चलफिर और दौड़ सके। इससे उनके शरीर में ऊर्जा आएंगी।
कब और कैसे नहलाएं: 
सर्दियों में पालतू पशुओं की साफ-सफाई पर विशेष ध्यान रखने की जरूरत होती है। क्योंकि इस मौसम में कई तरह के वायरस और बैक्टीरिया पनपते हैं। जो उन्हे बीमार कर सकते हैं। सर्दियों में धूप निकलने पर पशुओं को सप्ताह में 2 से 3 बार नहलाए।
ऐसे बढ़ाए दूध की मात्रा:
 सर्दियों में ठंड लगने पर गाय-भैंस व अन्य दुधारू पशुओं की दूग्ध उत्पादन की क्षमता ज्यादा प्रभावित होती है। दूध क्षमता बढ़ाने के लिए पशुओं को हर रोज 250 ग्राम गुड़ दें और उनके आहार का विशेष ध्यान रखें। सूखा और हरा चारा दो से एक के अनुपात में दे। क्योंकि सूखा चारा शरीर में ऊर्जा बनाए रखता है। पीने के लिए रात के रखे पानी का प्रयोग ना करे,ताजा पानी ही पिलाये जिससे शरीर हाइड्रेट रहेगा।
पशुओं को सर्दियों में ऊर्जा देने वाला आहार खिलाएं।  पशुओं के शरीर का तापमान बनाए रखने के लिए सरसों के तेल के साथ गुड़ को मिलाकर खिलाएं। सर्दियों में रात के समय किसान अपने पालतू जानवरों को सूखा चारा खिलाएं।

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