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टैक्सी चालक की बेटी और पहलवान चाचा की पहलवान भतीजी का सोनीपत पहुंचने पर हुआ जोरदार स्वागत

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2 सितम्बर, सोनीपत–हरियाणा की धरती देश के लिए इंटरनेशनल स्तर के पहलवान पैदा करती है, इसका ताजा उदाहरण जॉर्डन में आयोजित हुई अंडर 17 कुश्ती वर्ल्ड चैंपियनशिप में देखने को मिला. इस चैंपियनशिप में देश की महिला पहलवानों ने 5 गोल्ड , 2 सिल्वर और 1 ब्रॉन्ज पर कब्जा किया, और ये सभी पहलवान हरियाणा की मिट्टी में पैदा हुई है. इस प्रतियोगिता में सोनीपत के गांव लाठ की रहने वाली पहलवान काजल ने भी 76 किलोग्राम वर्ग में देश के लिए गोल्ड मेडल जीता, आपको बता दे कि काजल के पिता टैक्सी चालक है तो आपने चाचा से पहलवानी के गुर काजल ने सीखे है।
काजल ने छोटी सी उम्र में ही चाचा की पहलवानी को देखते हुए अखाड़े में हाथ आजमाने शुरू कर दिए थे जिसका नतीजा ये रहा कि जॉर्डन में आयोजित हुई अंडर 17 कुश्ती वर्ल्ड चैंपियनशिप में काजल ने यूक्रेन की पहलवान को 9 – 2 के अंतर से हराया और विदेशी धरती पर भारत का राष्ट्र गान और झंडे की शान बढ़ी. आपको बता दे कि काजल के पिता टैक्सी चालक है और उसके चाचा ने काजल को इंटरनेशनल पहलवान बनाने के लिए आपने सपनो को भी अधूरा छोड़ दिया, आज काजल के सोनीपत पहुंचने पर खेल प्रेमी उसका जोरदार स्वागत कर रहे हैं। काजल का कहना है कि आगामी ओलंपिक में देश के लिए गोल्ड मेडल लाने के लिए अब फिर से मेहनत शुरू होगी और अपने परिवार का सपना पूरा किया जाएगा।
काजल के चाचा कृष्ण का कहना है कि उनकी बेटी ने उनका मान बढ़ाया है और देश के लिए मेडल जीतकर वापस लौटने पर उसका आज गांव स्वागत कर रहा है, मुझे देखते हुए ही काजल को पहलवानी का शौक हुआ था और हमें उम्मीद है कि काजल देश के लिए आगामी ओलंपिक में मेडल लेकर आएगी तो देश की महिला कुश्ती के पूर्व चीफ कोच कुलदीप मलिक ने कहा कि काजल जैसी युवा पहलवान देश के लिए मेडल जीतकर आ रही है ये कुश्ती के लिए अच्छा है,और आगामी प्रतियोगिता और ओलंपिक को लेकर काजल को अब और भी तैयार करना है,आज गांव में काजल का स्वागत समरोह रखा गया है।

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