कैथल : चन्द्रिका ( TSN)-देशभर में महिला दिवस पर महिला सशक्तिकरण की बाते की जाती है. इस बारे में सेमिनार, संगोष्ठी, चर्चाएं भी होती है और महिला हितेषी बातों का शोरगुल राजनीतिक मंचों से होता हुआ शैक्षणिक संस्थानों तक पहुंच जाता है, लेकिन क्या सही मायने में महिलाओ को ये प्रोत्साहन मिल पाता है. इस बारे में THE SUMMER NEWS की टीम ने कैथल के सबसे पुराने कॉलेज आरकेएसडी की महिला प्रोफेसरो से बात की और आज के समय में महिलाओं की स्थिति को जानने का प्रयास किया.
पुरुष प्रधान मानसिकता आज भी है हावी
आजादी के लंबे समय बाद भी आज की महिलाओं के लिए महिला सशक्तिकरण की बात कितनी सही और सटीक नजर आती है। महिला प्रोफेसरो ने बताया कि महिला अपने राजनीतिक, सामाजिक, धार्मिक और घर की गृहणी से लेकर देश की सबसे बड़ी पंचायत संसद भवन में अपनी मौजूदगी दर्ज करती हुई. अदम्य साहस के अमिट छाप के साथ पहचान बना चुकी है। लेकिन लंबे समय के बाद भी जितना बदलाव होना चाहिए था,वह नही हुआ. पुरुष प्रधान मानसिकता के चलते अभी भी महिलाओं के हिस्से में कई क्षेत्रों में इंतजार आया है।







