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यहां दस हजार साल पहले की गेंहू प्रजाति, हड़प्पा काल के बीज भी संरक्षित…जानिए दिलचस्प इतिहास

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करनाल : चन्द्रिका ( TSN)- गेंहू से बनी रोटी हम नाश्ते से लेकर रात के खाने में खाते जरूर है, लेकिन शायद गेंहू के दिलचस्प इतिहास के बारे में अधिकतर लोग जानकारी नही रखते । भारतीय गेंहू एवम जौ अनुसंधान संस्थान की जीनोम लैब में दस हजार से अधिक किस्मो के गेंहू के बीज  रखे गए हैं ।
साल 1905 में शुरू हुआ था भारत में गेंहू की रिसर्च 
संस्थान के विशेषज्ञ डॉक्टर अरुण गुप्ता ने बताया कि दस हजार वर्ष पूर्व गेंहू की प्रजाति एजिलॉप टोचीन की नेचुरल क्रासिंग से वर्तमान गेंहू की उत्पत्ति हुई थी । गेंहू संस्थान में 110 वर्ष पुरानी गेंहू की प्रजाति NP4 के बीज रखे है । हड़प्पा काल और मोहनजोदड़ो की संस्कृति में गेंहू की ” स्प्रियो कोकम” प्रजाति उगाई जाती थी इस किस्म के बीज भी संस्थान में संजो कर रखे गए । शताब्दी पूर्व हमारे पूर्वज कौनसी किस्म की गेंहू उगाते और आज तक गेंहू की जितनी प्रजाति विकसित हुई सभी के बीज लैब में सुरक्षित रखे गए है। भारतीय गेंहू अनुसंधान संस्थान के निदेशक ज्ञानेंद्र सिंह ने बताया कि साल 1905 में भारत में गेंहू की रिसर्च शुरू हुआ था । उस समय की प्रजाति उत्पादन में कम थी,लेकिन उनकी गुणवत्ता और वातावरण अनुकूलता बहुत अच्छी थी । हमने संस्थान में दस हजार से अधिक वेरायटी के बीज सुरक्षित  रखे है । संस्थान में दो से ढाई हजार से अधिक प्रजातियां 70 से 100 साल पुरानी है । लाहौल स्पीति  की समर नर्सरी में भी इन पुराने बीजों का एक सेट रखा गया है ताकि समय आने पर प्रयोग किया जा सके । ज्ञानेंद्र सिंह ने बताया कि पुरानी प्रजातियों का नई किस्मों में समावेश जरूरी होता है जिस पर  संस्थान लगातार काम कर रहा है । दशकों पुरानी गेंहू के बीजों से उत्पादन भी लिया जाता है और इन पर शोध भी किया जाता है ।

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