राकेश कुमार शर्मा , करनाल। अपने लोकसभा क्षेत्र के दो दिवसीय दौरे के समापन पर केंद्रीय ऊर्जा, आवास एवं शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल ने करनाल और पानीपत में प्रशासनिक अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों तथा संबंधित विभागों के साथ विकास कार्यों की समीक्षा की। करनाल में आयोजित बैठक में उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं की प्रगति का जायजा लेते हुए अधिकारियों को सभी परियोजनाएं तय समयसीमा में पूरी करने के निर्देश दिए।
मनोहर लाल ने कहा कि विकास कार्यों में पारदर्शिता और गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं होना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि कार्यों में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
पत्रकारों से बातचीत में केंद्रीय मंत्री ने बताया कि पिछले छह महीनों में लोकसभा क्षेत्र के नौ गांवों में लंबित विकास कार्यों में काफी प्रगति हुई है। उन्होंने कहा कि कुछ परियोजनाओं में देरी का मुख्य कारण भूमि उपलब्ध न होना है, जबकि बजट की कोई कमी नहीं है। उन्होंने विश्वास जताया कि चालू वित्तीय वर्ष के अंत तक सभी लंबित कार्य पूरे कर लिए जाएंगे।
युवाओं से जुड़े सवाल पर मनोहर लाल ने कहा कि युवाओं को अपनी ऊर्जा आंदोलन और नकारात्मक गतिविधियों में लगाने के बजाय पढ़ाई, कौशल विकास और करियर निर्माण पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि युवा देश का भविष्य हैं और उन्हें रचनात्मक कार्यों तथा आत्मविकास पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।
कांग्रेस और विपक्ष पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि कुछ राजनीतिक दल हर मुद्दे पर राजनीति करने के आदी हो चुके हैं, जबकि जनता अब आरोप-प्रत्यारोप नहीं बल्कि विकास चाहती है। उन्होंने कहा कि जनता पिछली सरकारों और वर्तमान सरकार के विकास कार्यों की तुलना स्वयं कर रही है।
कारगिल विजय दिवस पर वीर सैनिकों को नमन करते हुए मनोहर लाल ने कहा कि कारगिल विजय भारत के इतिहास का गौरवशाली अध्याय है। उन्होंने सैनिकों के साहस, बलिदान और समर्पण को नमन करते हुए देशवासियों से सेना का सम्मान करने की अपील की।
शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार प्रह्लाद जोशी को दिए जाने पर उन्होंने कहा कि वे अनुभवी और सक्षम नेता हैं। उन्होंने कहा कि फिलहाल उन्हें अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है और स्थायी जिम्मेदारी को लेकर अंतिम निर्णय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करेंगे।
भारत-अमेरिका ट्रेड डील को लेकर किसानों की आशंकाओं पर केंद्रीय मंत्री ने संयम बरतने की अपील की। उन्होंने कहा कि किसी भी अंतरराष्ट्रीय समझौते पर निष्कर्ष निकालने से पहले उसके सभी पहलुओं को समझना जरूरी है। ऐसे फैसले किसानों, उपभोक्ताओं, अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखकर लिए जाते हैं।







